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41.3 करोड़ वाहन, नई नीति की मांग

भारत में पंजीकृत वाहनों की संख्या 41.3 करोड़ से अधिक पहुंचने के साथ ही परिवहन व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन और शहरी गतिशीलता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्षों में वाहनों की तेज वृद्धि के मुकाबले परिवहन ढांचे और नीतियों में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाए हैं।

बढ़ती वाहन संख्या का असर सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम, ईंधन खपत, सड़क सुरक्षा और वायु प्रदूषण के रूप में देखा जा रहा है। बड़े शहरों के साथ-साथ मध्यम और छोटे शहर भी यातायात दबाव का सामना कर रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिवहन नीतियां वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गई हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। इसके अलावा शहरी नियोजन और परिवहन नीति के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है।

नई परिवहन नीति के लिए की जा रही सिफारिशों में सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार, गैर-मोटर चालित परिवहन (साइकिल और पैदल यात्री सुविधाएं), डिजिटल ट्रैफिक प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को बढ़ावा देने जैसे सुझाव शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वाहन संख्या इसी गति से बढ़ती रही तो भविष्य में सड़क अवसंरचना पर दबाव और बढ़ सकता है। इसलिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ ऐसी नीति की आवश्यकता है जो आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और यातायात प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित कर सके।

नई राष्ट्रीय परिवहन नीति को लेकर चर्चा इस बात का संकेत है कि देश अब केवल वाहन संख्या बढ़ने के बजाय टिकाऊ और कुशल परिवहन व्यवस्था के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहता है।

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