ग्लोबल वॉर्मिंग से झीलों का सेल्फ-क्लीनिंग सिस्टम कमजोर, बढ़ा खतरा

ग्लोबल वॉर्मिंग का असर अब झीलों की प्राकृतिक सफाई व्यवस्था (Self-Cleaning System) पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण झीलों में पानी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे ऑक्सीजन का स्तर घटता है और पानी को स्वाभाविक रूप से साफ रखने वाली जैविक प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रदूषक तत्व और पोषक पदार्थ (Nutrients) अधिक मात्रा में जमा होने लगते हैं, जिससे शैवाल (Algae) की अत्यधिक वृद्धि, जल प्रदूषण और जलीय जीवों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा हो रही हैं।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यही स्थिति जारी रही, तो नदियों के माध्यम से प्रदूषक तत्व समुद्रों तक पहुंचेंगे और वहां ‘डेड जोन’ बनने का खतरा बढ़ जाएगा। डेड जोन ऐसे समुद्री क्षेत्र होते हैं जहां ऑक्सीजन का स्तर इतना कम हो जाता है कि अधिकांश मछलियां और अन्य समुद्री जीव जीवित नहीं रह पाते। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी, जल स्रोतों के प्रदूषण पर नियंत्रण और झीलों के संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां अपनाना बेहद जरूरी है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर जल संसाधनों, जैव विविधता, मत्स्य पालन और मानव जीवन पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।



