
मद्रास हाई कोर्ट ने सरोगेसी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि 51 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले तक महिला सरोगेसी के माध्यम से मातृत्व का विकल्प चुनने के लिए पात्र हो सकती है। अदालत ने संबंधित प्रावधानों की व्याख्या करते हुए यह टिप्पणी की कि पात्रता का निर्धारण लागू कानून और निर्धारित शर्तों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले के तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर दिया गया है। साथ ही यह भी कहा कि सरोगेसी की अनुमति अन्य सभी वैधानिक शर्तों, चिकित्सीय आवश्यकताओं और सक्षम प्राधिकरण की प्रक्रिया के अधीन रहेगी।
यह फैसला उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो निर्धारित आयु सीमा के भीतर चिकित्सकीय कारणों से सरोगेसी का विकल्प अपनाना चाहती हैं। हालांकि, प्रत्येक मामले का निर्णय उसकी परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग होगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सरोगेसी कानून की व्याख्या को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यदि इस मामले में आगे किसी उच्च न्यायालय या Supreme Court of India में अपील होती है, तो अंतिम कानूनी स्थिति उस निर्णय के अनुसार तय होगी।



