
संसद परिसर में उस समय राजनीतिक हलचल देखने को मिली जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी आमने-सामने आए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और कुछ देर तक लंबी बातचीत भी की, जिसे सामान्य शिष्टाचार मुलाकात से आगे देखा जा रहा है।
इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि अक्सर दोनों नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। हालांकि संसद परिसर में इस तरह की अनौपचारिक मुलाकातें लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा मानी जाती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी मुलाकातें संवाद की संभावना को दर्शाती हैं, भले ही दोनों दलों के बीच मतभेद बने रहें। अब देखना होगा कि इस बातचीत का कोई राजनीतिक असर आगे देखने को मिलता है या यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी।



