
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया तीन देशों की यात्रा के दौरान भारत की एक्ट ईस्ट नीति पर विशेष जोर देखने को मिला। इस नीति का उद्देश्य भारत को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापार, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर और मजबूत करना है।
इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना जताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की क्षेत्रीय उपस्थिति मजबूत होगी और वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी भूमिका और महत्वपूर्ण बन सकती है।
भारत की विदेश नीति में एक्ट ईस्ट नीति को लंबे समय से एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। ऐसे में इस तरह के उच्च स्तरीय दौरे न केवल कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करते हैं, बल्कि व्यापार और निवेश के नए अवसर भी खोलते हैं। हालांकि, इन समझौतों का वास्तविक असर आने वाले समय में उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।



