धर्म-आस्था

Jagannath Rath Yatra 2026: 16 जुलाई से शुरू होगी रथ यात्रा, 108 घड़ों से स्नान के बाद बीमार पड़ते हैं भगवान

विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ने लगा है। भगवान जगन्नाथ की यह भव्य यात्रा 16 जुलाई से आरंभ होगी, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली यह यात्रा सनातन परंपरा और आस्था का अद्भुत संगम मानी जाती है।

रथ यात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को 108 पवित्र घड़ों के जल से स्नान कराया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अत्यधिक स्नान के कारण भगवान को ज्वर हो जाता है और वे लगभग 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि को ‘अनसर काल’ कहा जाता है, जब मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहते हैं।

मान्यता के अनुसार भगवान इस दौरान औषधि ग्रहण करते हैं और स्वस्थ होने के बाद नवयौवन रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसमें तीनों देवता अपने-अपने विशाल रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं।

जगन्नाथ रथ यात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसमें जाति, धर्म और वर्ग का कोई भेदभाव नहीं माना जाता। भगवान के रथ को खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और लाखों श्रद्धालु इस अवसर का इंतजार करते हैं।

धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं के अनुसार रथ यात्रा केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भगवान के अपने भक्तों के बीच आने का प्रतीक भी है। यही कारण है कि इसे भारत के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।

हर वर्ष की तरह इस बार भी पुरी में सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं, ताकि यह महापर्व श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न हो सके।

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