Parama Ekadashi 2026: परमा एकादशी पर करें इन 10 चीजों का त्याग, पद्म पुराण में बताए गए नियम जानें

परमा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत पुण्यदायी एकादशियों में से एक मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत, जप, तप और दान का विशेष महत्व होता है। पद्म पुराण तथा अन्य वैष्णव ग्रंथों में एकादशी व्रत को केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का माध्यम बताया गया है।
परमा एकादशी पर इन 10 चीजों का त्याग करने की सलाह दी जाती है:
- अन्न और चावल का सेवन
- तामसिक भोजन
- मांस और मदिरा
- क्रोध और कटु वचन
- झूठ बोलना
- निंदा और चुगली
- लोभ और अहंकार
- अनावश्यक विवाद
- अत्यधिक निद्रा
- नकारात्मक विचार
धार्मिक मान्यता है कि व्रत के दौरान व्यक्ति को सात्विक आचरण अपनाना चाहिए और भगवान विष्णु के नाम का स्मरण करना चाहिए। तुलसी पूजन, विष्णु सहस्रनाम पाठ और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप विशेष फलदायी माना जाता है।
एकादशी तिथि के नियम
एकादशी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार निर्जला, फलाहार या सात्विक उपवास रख सकते हैं। दिनभर भगवान विष्णु की आराधना और भक्ति में समय बिताना शुभ माना गया है।
द्वादशी तिथि के नियम
व्रत का पारण द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पारण में विलंब करना उचित नहीं माना गया है। पारण से पहले भगवान विष्णु का स्मरण कर ब्राह्मण, गौ या जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना शुभ माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि एकादशी का वास्तविक महत्व केवल उपवास में नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सदाचार और ईश्वर भक्ति में निहित है। इसलिए व्रत के दौरान शारीरिक और मानसिक शुद्धता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जाता है।
नोट: धार्मिक तिथियों, व्रत नियमों और पारण के समय में क्षेत्रीय परंपराओं एवं पंचांगों के अनुसार अंतर हो सकता है। व्रत से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य धार्मिक विद्वान की सलाह लें।



