कानपुर: अधिवक्ता अखिलेश दुबे समेत दो गिरफ्तार, BJP नेता से 50 लाख की मांग और झूठे रेप केस की साजिश
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक वरिष्ठ बीजेपी नेता को झूठे रेप केस में फंसाने की साजिश रची गई। इस मामले में प्रमुख अधिवक्ता अखिलेश दुबे समेत दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर बीजेपी नेता से 50 लाख रुपये की मांग करने और ब्लैकमेल करने का आरोप है।
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी नेता को एक महिला के माध्यम से झूठे यौन शोषण के आरोप में फंसाने की योजना बनाई गई थी। इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड अधिवक्ता अखिलेश दुबे बताया जा रहा है, जो कानपुर का एक जाना-माना वकील है। जब पीड़ित नेता ने रकम देने से इनकार किया, तो उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
पीड़ित ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे संपर्क किया और लिखित शिकायत दी। मुख्यमंत्री कार्यालय से तुरंत एक्शन लेते हुए कानपुर पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए। प्राथमिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अधिवक्ता अखिलेश दुबे और उनके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज़, ऑडियो और वीडियो क्लिप्स बरामद हुई हैं, जिनका इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जा रहा था। इस मामले में शामिल महिला की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस ने उसके खिलाफ तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार किए जाने की संभावना है।
इस घटना ने न केवल कानपुर की राजनीतिक गलियों में हलचल मचा दी है, बल्कि कानूनी पेशे की गरिमा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। बार काउंसिल ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि कोई अधिवक्ता कानून का दुरुपयोग करता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा है कि “उत्तर प्रदेश में किसी को भी कानून हाथ में लेने या उसका दुरुपयोग करने की छूट नहीं है। जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
यह मामला यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए न केवल राजनीति को बदनाम करते हैं बल्कि न्याय प्रणाली पर भी आघात करते हैं। पुलिस की सख्त कार्रवाई और मुख्यमंत्री के त्वरित हस्तक्षेप से यह स्पष्ट हो गया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।



