उत्तर प्रदेश

अयोध्या दीपोत्सव 2026 : सीएम योगी के नेतृत्व में विश्व संस्कृति का प्रकाश पर्व बना दीपोत्सव

दस वर्षों की यात्रा में अयोध्या की परंपराओं को मिला नया विस्तार

अयोध्या, 08 नवंबर : सरयू तट पर प्रज्ज्वलित दीप, रामकथा पार्क में प्रभु श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक का उल्लास और देश-विदेश के कलाकारों की प्रस्तुतियों में जीवंत होती रामकथा। अयोध्या के दसवें दीपोत्सव ने भक्ति, प्रकाश और संस्कृति को ऐसे साझा अनुभव में बदल दिया, जिसमें स्थानीय परंपराओं के साथ विश्व की रामायण संस्कृतियां भी सहभागी बनीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दस वर्षों की यह यात्रा आयोजन के विस्तार के साथ भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति बनी है। अयोध्या का दीपोत्सव आज अपनी विरासत को सहेजते हुए उसे दुनिया के सामने प्रस्तुत करने और विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

इस परिवर्तन के केंद्र में वह दृष्टि है, जिसमें धार्मिक परंपरा, लोक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव को व्यापक स्वरूप देने के साथ उसके मूल में निहित रामकथा और अयोध्या की स्थानीय पहचान को महत्व दिया है। इसी कारण आयोजन में दीपों के प्रकाश के साथ कलाकारों की साधना, संतों का सान्निध्य और विदेशी आगंतुकों की जिज्ञासा भी दिखाई देती है। दसवां दीपोत्सव इस दृष्टि को आगे बढ़ाता है कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर भी दुनिया के साथ आत्मीय संवाद किया जा सकता है।

*दस वर्षों में विस्तृत हुआ सांस्कृतिक क्षितिज*

योगी सरकार में दस आयोजनों की यात्रा में दीपोत्सव का महत्व उसके सांस्कृतिक स्वरूप के विस्तार में भी दिखाई देता है। राम की पैड़ी का दीप प्रज्ज्वलन, सरयू आरती, रामकथा के प्रसंग और मंचीय प्रस्तुतियां मिलकर अयोध्या की पहचान को व्यापक बनाती हैं। यहां पहुंचने वाला व्यक्ति धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उस परंपरा का अनुभव करता है, जिसे पीढ़ियों से कलाकारों, कथाकारों और श्रद्धालुओं ने जीवंत रखा है। आयोजन की यही विशेषता इसे सांस्कृतिक स्मृतियों और वर्तमान की आकांक्षाओं से जोड़ती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहभागिता इस सांस्कृतिक दृष्टि को प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति देती है। दीपोत्सव में उन्होंने प्रभु श्रीराम के स्वरूप का स्वागत किया और राम रथ खींचा। रामकथा पार्क में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की उपस्थिति में प्रतीकात्मक राज्याभिषेक हुआ। इन प्रसंगों ने राम के अयोध्या आगमन की स्मृति को सामूहिक उत्सव का रूप दिया। आस्था से जुड़े ये दृश्य नई पीढ़ी के सामने परंपरा को जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

परंपरा के साथ आधुनिक प्रस्तुति का समावेश भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण पक्ष है। प्रकाश संयोजन, प्रोजेक्शन और रामायण के प्रसंगों की दृश्यात्मक प्रस्तुतियां दर्शकों को कथा से जोड़ने के नए माध्यम बन रही हैं। इससे सांस्कृतिक विषयों तक उन लोगों की पहुंच भी बनती है, जो उन्हें पहली बार देख या समझ रहे हैं। दीपोत्सव में आधुनिक तकनीक का महत्व उसकी इसी भूमिका में है कि वह विरासत के संदेश को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाए।

*विश्व की रामकथाओं का संगम बनी अयोध्या*

दीपोत्सव की वैश्विक पहचान का ठोस आधार विदेशी कलाकारों की सहभागिता है। श्रीलंका, लाओस और दक्षिण अफ्रीका की रामलीलाएं बताती हैं कि रामकथा ने विभिन्न समाजों में अपनी सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां विकसित की हैं। भाषा, संगीत, वेशभूषा और अभिनय की शैलियां अलग होने पर भी कथा का भाव दर्शकों को जोड़ता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकसित यह मंच भारत की सांस्कृतिक प्रभाव क्षमता को समझने का अवसर देता है। जब दूसरे देशों के कलाकार अपनी शैली में रामकथा प्रस्तुत करते हैं, तब भारत और उन देशों के बीच साझा सांस्कृतिक स्मृतियों का संवाद होता है। अयोध्या इस संवाद का केंद्र बनती है। यहां भारतीय दर्शक विदेशी प्रस्तुतियों को देखते हैं और विदेशी कलाकार रामकथा से जुड़े भारतीय परिवेश का अनुभव करते हैं। यह आदान-प्रदान परस्पर सम्मान और सांस्कृतिक निकटता की संभावनाएं बढ़ाता है।

इसी मंच पर असम, जम्मू-कश्मीर, केरल, उत्तराखंड और बंगाल की लोककलाओं की उपस्थिति भारत की अपनी विविधता को अभिव्यक्ति देती है। अलग-अलग क्षेत्रों की कलात्मक परंपराएं एक आयोजन में स्थान पाती हैं तो दर्शकों के सामने भारतीय संस्कृति का व्यापक स्वरूप आता है। दीपोत्सव में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों का संगम इस विचार को बल देता है कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास अपनी पहचान को सुरक्षित रखते हुए दूसरी अभिव्यक्तियों के स्वागत से भी समृद्ध होता है।

*स्थानीय विरासत को मिला वैश्विक मंच*

इस बार साहबगंज की 151 वर्ष पुरानी रामलीला को पहली बार दीपोत्सव का मंच मिलना विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री की अपेक्षा के अनुरूप स्थानीय रामलीलाओं का अवलोकन कर इसका चयन किया गया। अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने इसे अयोध्या की सबसे पुरानी रामलीला बताया है। केंद्रीय रामलीला कमेटी के जिलाध्यक्ष मनोज जायसवाल के अनुसार यह इसकी प्रस्तुति का 151वां वर्ष है। यह पहल स्थानीय सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान देने का उदाहरण है।

विदेशी प्रस्तुतियों के साथ स्थानीय कलाकारों को अवसर मिलना आयोजन की सांस्कृतिक दृष्टि को और स्पष्ट करता है। पीढ़ियों से रामकथा का मंचन करने वाले कलाकार अपनी परंपरा के संवाहक हैं। उन्हें बड़े मंच पर स्थान मिलने से उनके काम को सम्मान मिलता है और दर्शक अयोध्या की अपनी कलात्मक विरासत से परिचित होते हैं। ऐसी सहभागिता युवा कलाकारों को परंपरा से जुड़ने की प्रेरणा भी दे सकती है। इससे वैश्विक पहचान की यात्रा में स्थानीय समाज की भागीदारी मजबूत होती है।

संतों का सम्मान भी इसी सांस्कृतिक निरंतरता का हिस्सा है। दीपोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री ने संतों को मिष्ठान और उपहार भेंट किए। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से देश-विदेश में अयोध्या का नाम हुआ। उन्होंने धर्म और संस्कृति की सुरक्षा के लिए सीएम योगी की सराहना की।

*विदेशी आगंतुकों के लिए यादगार अनुभव बनी भारतीय संस्कृति*

दीपोत्सव की अंतरराष्ट्रीय पहुंच कलाकारों के साथ विदेशी आगंतुकों की सहभागिता में भी दिखाई देती है। अमेरिका के शिकागो से आए पॉल और शेल्बे ने सरयू आरती में भाग लिया और राम की पैड़ी पर स्थानीय लोगों के साथ दीप जलाए। दोनों के लिए सुनी हुई अयोध्या प्रत्यक्ष सांस्कृतिक अनुभव में बदल गई।
अर्जेंटीना और रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से आए आगंतुकों की उपस्थिति भी रामनगरी के प्रति अंतरराष्ट्रीय जिज्ञासा को सामने लाती है। किसी के लिए यहां रामकथा को समझने का आकर्षण है तो किसी के लिए आध्यात्मिक अनुभव की तलाश। स्थानीय लोगों के साथ उत्सव में शामिल होने से आगंतुकों को भारतीय संस्कृति के सामाजिक और सामुदायिक पक्ष से परिचित होने का अवसर मिलता है। दीपोत्सव इस तरह अयोध्या को देखने के साथ उसे महसूस करने का माध्यम बनता है।

इस सांस्कृतिक आकर्षण के साथ स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्पियों और पर्यटन सेवाओं के लिए अवसर बढ़ने की संभावनाएं भी जुड़ी हैं। इन अवसरों को स्थायी आजीविका में बदलने के लिए स्थानीय भागीदारी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दीपोत्सव को मिले विस्तार का व्यापक अर्थ यही है कि विरासत के संरक्षण और नए अवसरों की दिशा एक-दूसरे से जुड़ सके।

दसवें दीपोत्सव में सरयू तट का प्रकाश, साहबगंज के कलाकारों की परंपरा और विदेशी प्रस्तुतियों की विविधता एक साझा सांस्कृतिक चित्र रचती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या का यह आयोजन भारत की जीवंत विरासत को विश्व के सामने रखने का सशक्त माध्यम बना है। रामनगरी से निकलता यह सांस्कृतिक प्रकाश स्थानीय प्रतिभा को सम्मान, परंपरा को निरंतरता और दुनिया को भारत से जुड़ने का आत्मीय अवसर देता है।

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