यूपी में घटेंगे 4-5 हजार पोलिंग बूथ, SIR के बाद चुनाव खर्च में बचत

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का असर मतदान केंद्रों की संख्या पर भी दिखाई देने वाला है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद प्रदेश में करीब 4 से 5 हजार पोलिंग बूथ कम होने का अनुमान है। इससे आगामी विधानसभा चुनाव में निर्वाचन व्यवस्था को पहले की तुलना में कम मतदान केंद्रों के साथ संचालित किया जा सकेगा।
SIR के दौरान मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पुनरीक्षण के दौरान उत्तर प्रदेश में करीब 2.04 करोड़ नाम हटाए गए थे। हालांकि अंतिम मतदाता सूची जारी होने तक दावों और आपत्तियों के बाद मतदाताओं की संख्या में फिर बढ़ोतरी हुई। अप्रैल 2026 में जारी अंतिम सूची में प्रदेश में 13.39 करोड़ से अधिक मतदाता दर्ज किए गए।
पोलिंग बूथ कम होने से क्या फायदा होगा?
पोलिंग बूथों की संख्या कम होने से चुनाव में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों की जरूरत भी घट सकती है। मतदान कर्मियों की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था, परिवहन, ईवीएम की आवाजाही और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च में बचत की संभावना है।
2027 चुनाव की तैयारी पर असर
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं और आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए निर्वाचन तंत्र पहले से तैयारियों में जुटा है। SIR के बाद नई मतदाता सूची के आधार पर मतदान केंद्रों का पुनर्गठन किया जाएगा। इससे कई क्षेत्रों में बूथों का समायोजन और मतदाताओं के अनुसार मतदान केंद्रों की नई व्यवस्था देखने को मिल सकती है।
मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव
पोलिंग बूथों की संख्या घटने के बाद कुछ मतदाताओं को पहले की तुलना में अलग मतदान केंद्र आवंटित किया जा सकता है। इसलिए चुनाव से पहले मतदाताओं के लिए अपने नाम के साथ मतदान केंद्र की जानकारी भी जांचना महत्वपूर्ण होगा।
कुल मिलाकर SIR के बाद मतदाता सूची और मतदान केंद्रों की व्यवस्था में बदलाव 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। पोलिंग बूथों की संख्या में संभावित कमी से जहां चुनावी खर्च घटने की उम्मीद है, वहीं प्रशासन के सामने मतदान केंद्रों पर पर्याप्त सुविधाएं और सुचारु मतदान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी रहेगी।



