धर्म रक्षक एवं राष्ट्र रक्षक महा सम्मेलन: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का समाज जागृति का आह्वान

धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए समय-समय पर समाज में जागरूकता लाने वाले महा सम्मेलनों का आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल मानी जाती है। इन्हीं प्रयासों की कड़ी में धर्म रक्षक एवं राष्ट्र रक्षक महा सम्मेलनों का आयोजन किया गया, जिसमें उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाज को एक नई दिशा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन केवल धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन भर नहीं होते, बल्कि यह समाज की चेतना को जागृत करने और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध को मजबूत बनाने का सशक्त माध्यम होते हैं।
श्री मौर्य ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि आज की पीढ़ी को अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के प्रति समर्पित होने की आवश्यकता है। वैश्वीकरण के इस युग में जहां एक ओर आधुनिकता का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संजोकर रखना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धर्म रक्षक और राष्ट्र रक्षक बनने का तात्पर्य केवल पूजा-पाठ या देशभक्ति के नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ है समाज में भाईचारा, नैतिकता और राष्ट्रहित की भावना को निरंतर जीवित रखना।
महा सम्मेलन में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएँ और आमजन शामिल हुए। मंच से दिए गए संदेशों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जब तक समाज में धार्मिक और राष्ट्रीय चेतना प्रबल नहीं होगी, तब तक देश की प्रगति अधूरी रहेगी। उप मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एक सशक्त भारत की नींव तभी रखी जा सकती है, जब समाज का हर व्यक्ति धर्म और राष्ट्र की रक्षा को अपना सर्वोपरि कर्तव्य माने।
सम्मेलन के माध्यम से समाज को यह भी समझाने का प्रयास किया गया कि आस्था और राष्ट्रप्रेम एक-दूसरे के पूरक हैं। धर्म हमें सत्य, अहिंसा, करुणा और परोपकार का मार्ग दिखाता है, जबकि राष्ट्रभक्ति हमें एकता, अनुशासन और त्याग की प्रेरणा देती है। जब ये दोनों शक्तियां एक साथ आती हैं तो समाज में ऐसी जनजागृति का संचार होता है जो किसी भी कठिनाई का सामना करने में सक्षम बनाती है।
अंत में श्री मौर्य ने युवाओं का आह्वान किया कि वे धर्म और राष्ट्र रक्षा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली इतिहास की रक्षा करना हम सभी का दायित्व है। महा सम्मेलन से यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि समाज में जनजागृति के बिना न तो धर्म सुरक्षित रह सकता है और न ही राष्ट्र मजबूत हो सकता है। इसलिए इस प्रकार के आयोजन समाज को नई ऊर्जा देने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में मील का पत्थर साबित होते हैं।



