उत्तर प्रदेशगोरखपुर

जाने कितनी दरारें हैं फिर भी कैसा रिश्ता है टूटता ही नहीं : नुसरत अतीक “गोरखपुरी”

इस तरह नुसरत के बहुत से अशआर हैं जो लोगों को ज़बानी याद हैं ये भी उनकी महबूबियत की निशानी है ।नुसरत के कलाम पर लिखते हुए आलमी शोहरत याफ़्ता नाजि़म और शायर डॉ कलीम कै़सर साहेब ने लिखा था की नुसरत की शायरी इंसानी अज़मत ओ विका़र की शायरी है जिसमे औरत की अज़मत का भरपूर एहसास बेदार होता है ।उस्ताद शायर फा़रूक जायसी साहेब नुसरत की शायरी पर अपने ख़्यालात का इज़हार करते हुए लिखते हैं की नुसरत अपने दौर की बहुत मोतबर और जू़द गो, “जल्दी शेर कहने वाली” शायरा हैं जिसकी मिसाल इस दौर में कम पाई जाती है। इस तरह नुसरत अतीक़ की शायरी पर मुल्क के कई बड़े नाक़दीन ने अपने ख़्यालात का इज़हार किया है।
मुझे भी रतजगे रास आ गए तो
भटक जाएंगे रस्ता ख़्वाब तेरे
तुझको पहचानने में चूक हुई
ज़हर को मैंने क्यों दवा जाना
जुदा होने से पहले सोच लें हम
बिछड़़ के दोनों क्या ज़िंदा रहेंगे
हिज्र में कौन पहले मरता है
आओ ये तजुर्बा भी कर देखें
जाने कितनी दरारें हैं फिर भी
कैसा रिश्ता है टूटता ही नहीं
तुमने जैसे बदल लिया ख़ुद को
क्या कोई इस तरह बदलता है
अब तिरे पास है मिरा सब कुछ
मुझमें कुछ भी नहीं रहा मेरा
पहले तो दिल से दिल को मिलाने की बात थी
अब हुक्म ये हुआ है कि दूरी बनाएं लोग
नुसरत अतीक़ अपने अहद की नुमाइंदा शायरात की सफ़ में खड़ी नज़र आती हैं इतनी जल्दी 4 शेरी मजमूओं की खा़लिक़ नुसरत अतीक़ अपने मुआशरे की सच्ची आईनादारी कर रही हैं, उनके शायकीन को उनसे बेहतर से बेहतर कलाम की उम्मीद है।

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