राजू भैया, केशव से लेकर सीएम योगी तक, अलीगढ़ से BJP का अखिलेश यादव के पीडीए के खिलाफ हुंकारा

उत्तर प्रदेश की सियासत में इस समय अलीगढ़ सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है। यहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बड़ी रैली के माध्यम से समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। इस रैली में प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष राजा भैया ने एक साथ मंच साझा कर अखिलेश यादव और उनकी राजनीति को आड़े हाथों लिया।
भाजपा नेताओं ने जनता के सामने यह साफ संदेश देने की कोशिश की कि अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला केवल एक चुनावी हथकंडा है, जबकि भाजपा वास्तविक विकास और सबका साथ-सबका विकास की नीति पर काम कर रही है। योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में अलीगढ़ की जनता से अपील करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी की राजनीति जातिवाद और तुष्टिकरण पर आधारित रही है। उन्होंने जोर दिया कि भाजपा का लक्ष्य गरीब, किसान, महिला और युवा—सभी वर्गों को समान रूप से अवसर और सम्मान देना है।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “पीडीए की आड़ में अखिलेश यादव पिछड़े वर्गों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि असली काम भाजपा की सरकार कर रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों की सुविधा के लिए जितने कार्य भाजपा ने किए हैं, उतने किसी सरकार ने नहीं किए।”
वहीं, राजा भैया ने अपने तीखे अंदाज़ में अखिलेश यादव पर प्रहार करते हुए कहा कि सपा का इतिहास गुंडाराज और भ्रष्टाचार से भरा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब जातिवादी राजनीति से ऊपर उठ चुकी है और उन्हें केवल विकास चाहिए। अलीगढ़ की रैली में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि भाजपा का संदेश आम जनता तक पहुँच रहा है।
इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा असर यह रहा कि भाजपा ने यह साफ कर दिया कि 2025 और 2027 के चुनावों के लिए उसकी रणनीति केवल जातीय समीकरणों को काटने की नहीं है, बल्कि समाजवादी पार्टी की राजनीतिक जमीन को कमजोर करने की है। भाजपा नेताओं ने एक सुर में कहा कि अखिलेश यादव के पीडीए को जनता नकार चुकी है और 2027 में उत्तर प्रदेश फिर से भाजपा की सरकार बनाएगा।
अलीगढ़ की यह रैली न केवल अखिलेश यादव के पीडीए पर सीधा प्रहार थी, बल्कि भाजपा के लिए भी शक्ति प्रदर्शन का मंच बनी। योगी आदित्यनाथ और भाजपा के अन्य नेताओं ने यह संकेत दे दिया कि आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी के खिलाफ भाजपा का अभियान और भी आक्रामक होगा।



