यूपी में गोशालाएं बनेंगी ‘सर्कुलर बायो-इकोनॉमी हब’, सालाना 2 करोड़ कमाई का मॉडल तैयार

उत्तर प्रदेश में गोशालाओं को अब ‘सर्कुलर बायो-इकोनॉमी हब’ के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सरकार ने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसके तहत गोशालाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी और सालाना बड़ी आय अर्जित कर सकेंगी।
इस योजना में गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद, बायोगैस, प्राकृतिक उत्पाद और अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। इससे जहां गोशालाओं के संचालन में आर्थिक मदद मिलेगी, वहीं पर्यावरण अनुकूल उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा।
मॉडल के अनुसार, बेहतर प्रबंधन और संसाधनों के उपयोग से कुछ बड़ी गोशालाओं में सालाना 2 करोड़ रुपये तक की आय की संभावना जताई जा रही है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, प्रोसेसिंग यूनिट और बाजार से जुड़ाव को बढ़ावा दिया जाएगा।
अधिकारियों का मानना है कि यह पहल गोवंश संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकती है। गोशालाओं को केवल खर्च वाली व्यवस्था के बजाय उत्पादन और रोजगार से जोड़ने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, इस मॉडल की सफलता के लिए बेहतर प्रबंधन, उत्पादों की गुणवत्ता, बाजार उपलब्धता और नियमित निगरानी जैसी चुनौतियों का समाधान करना भी जरूरी होगा।



