कानपुर डीएम पहुंचे तहसील दिवस: जनता की शिकायतों के त्वरित निपटारे के दिए निर्देश, DCP समेत अधिकारी मौजूद

कानपुर में आयोजित तहसील दिवस कार्यक्रम में जिलाधिकारी (डीएम) ने जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। तहसील दिवस का मुख्य उद्देश्य है कि आम नागरिकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने और उनका समाधान कराने के लिए उच्च अधिकारियों तक सीधा मंच मिले। इसी क्रम में डीएम ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए और किसी भी मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस अवसर पर डीसीपी समेत कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। लोगों ने अपनी-अपनी समस्याएं रखीं जिनमें भूमि विवाद, राजस्व से जुड़ी दिक्कतें, पेंशन, आवास, बिजली व पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से संबंधित शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं। डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी शिकायतों की एंट्री सुनिश्चित की जाए और उन्हें समयबद्ध तरीके से निस्तारित किया जाए ताकि जनता को राहत मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान डीएम ने अधिकारियों को यह भी कहा कि तहसील दिवस केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि वास्तव में जनता की समस्याओं का समाधान करने का केंद्र बने। उन्होंने साफ निर्देश दिए कि कोई भी शिकायत लंबित न छोड़ी जाए और संबंधित विभागों को निर्धारित समय सीमा में जवाब देना ही होगा।
डीसीपी और अन्य पुलिस अधिकारियों से भी डीएम ने कहा कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करें ताकि नागरिकों में विश्वास और प्रशासन की सकारात्मक छवि बनी रहे। कई मामलों में उन्होंने मौके पर ही निस्तारण के आदेश दिए और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
तहसील दिवस में पहुंचे ग्रामीणों और शहरवासियों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना की और उम्मीद जताई कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द मिलेगा। डीएम ने यह भी कहा कि हर माह तहसील दिवस के माध्यम से जनता से संवाद स्थापित किया जाएगा और समस्याओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।
अंत में डीएम ने सभी अधिकारियों को यह संदेश दिया कि जनता के हित में कार्य करना ही प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे अपनी समस्याओं को तहसील दिवस जैसे मंच पर अवश्य रखें, ताकि समाधान समय पर मिल सके।
कानपुर में तहसील दिवस का यह आयोजन प्रशासन और जनता के बीच संवाद और विश्वास की कड़ी को और मजबूत करता है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण की प्रक्रिया भी सुदृढ़ होती है।



