खरीफ की खेती का रकबा 17% बढ़ा, लखनऊ में कृषि मंत्री बोले- स्टॉक में 6 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन की खेती इस वर्ष पिछले साल की तुलना में करीब 17% अधिक रकबे में की जा रही है। प्रदेश के कृषि मंत्री ने लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि यह बढ़ोतरी किसानों के उत्साह और सरकार की समय पर की गई तैयारियों का नतीजा है। धान, मक्का, बाजरा और दलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई बड़े पैमाने पर की जा रही है, जिससे प्रदेश में खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद है।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के लिए खाद और बीज की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। फिलहाल प्रदेश में 6 लाख मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है, जो खरीफ सीजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। इसके अलावा डीएपी और अन्य उर्वरकों की भी समुचित आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार लगातार केंद्र सरकार और कंपनियों के संपर्क में है ताकि किसानों को समय पर खाद मिले और उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में किसानों को खाद के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था, लेकिन अब पूरी आपूर्ति प्रणाली ऑनलाइन मॉनिटरिंग के जरिए संचालित हो रही है। हर जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद भेजी जा रही है और किसानों को सिर्फ मानक दर पर खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार का दावा है कि खरीफ सीजन में खेती के बढ़े रकबे से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं और बीज की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। धान जैसी मुख्य खरीफ फसल के साथ-साथ दालों और मोटे अनाज की खेती को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि पोषण सुरक्षा और किसानों की आर्थिक स्थिति दोनों मजबूत हो सकें।
कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे आधुनिक खेती तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को कृषि यंत्र, बीज और उर्वरक पर सब्सिडी प्रदान कर रही है। साथ ही, मौसम की जानकारी और फसल सुरक्षा से जुड़े सुझाव मोबाइल एप और हेल्पलाइन के जरिए किसानों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
कुल मिलाकर, खरीफ सीजन में 17% बढ़े रकबे और 6 लाख मीट्रिक टन यूरिया स्टॉक की उपलब्धता उत्तर प्रदेश में कृषि विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।



