भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बड़ा फैसला, ड्रोन से होगा सर्वे

भारत-नेपाल सीमा से जुड़े पुराने तकनीकी विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब सीमा के नदी वाले हिस्सों का संयुक्त सर्वे ड्रोन तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। इससे सीमा की वास्तविक स्थिति, नदी की बदलती धारा और जमीन से जुड़े विवादित क्षेत्रों की अधिक सटीक मैपिंग करने में मदद मिलेगी।
लखनऊ में 14 अगस्त को सर्वे अधिकारियों की समिति की 13वीं बैठक हुई। इसी बैठक में नदी वाले हिस्सों के ड्रोन सर्वे पर सहमति बनी। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से ऐसे क्षेत्रों का सर्वे करना आसान होगा, जहां पारंपरिक तरीके से सीमा का निर्धारण करना चुनौतीपूर्ण होता है।
भारत-नेपाल सीमा के कई हिस्सों में नदियों का बहाव समय के साथ बदलता रहता है। ऐसे में जमीन पर सीमा की स्थिति को लेकर तकनीकी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। ड्रोन से प्राप्त तस्वीरों और भू-स्थानिक आंकड़ों की मदद से सीमा की स्थिति का विस्तृत आकलन किया जा सकेगा।
संयुक्त ड्रोन सर्वे का एक अहम उद्देश्य सीमा के नदी वाले हिस्सों की मैपिंग करना है। इससे दोनों देशों के अधिकारियों के पास एक जैसी और अधिक सटीक भौगोलिक जानकारी उपलब्ध हो सकती है। इससे भविष्य में सीमा निर्धारण से जुड़े मतभेदों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
भारत-नेपाल सीमा उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से होकर गुजरती है। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सीमा स्तंभों, अतिक्रमण और जमीन से जुड़े मामलों को लेकर समय-समय पर सर्वे की जरूरत पड़ती रही है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के सर्वे और सीमा स्तंभों से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी दी जाती रही है।
ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से सर्वे की प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक होने की संभावना है। ऊंचाई से ली गई तस्वीरों और डिजिटल मैपिंग के जरिए नदी के किनारे और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति का बेहतर रिकॉर्ड तैयार किया जा सकता है। इससे दोनों देशों के अधिकारियों को सीमा से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी और सीमा प्रबंधन के लिहाज से भी सटीक मैपिंग महत्वपूर्ण है। सीमा स्तंभों की स्थिति, नदी के बहाव और आसपास के भूभाग की जानकारी अपडेट रहने से संबंधित एजेंसियों के लिए निगरानी और प्रबंधन आसान हो सकता है।
इस फैसले को भारत और नेपाल के बीच सीमा से जुड़े तकनीकी मुद्दों को बातचीत और वैज्ञानिक सर्वेक्षण के माध्यम से सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संयुक्त सर्वे से तैयार होने वाले आंकड़ों के आधार पर भविष्य में नदी वाले सीमा क्षेत्रों से जुड़े मामलों का समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।



