नियमितीकरण का अधिकार कर्मचारी की मृत्यु से खत्म नहीं: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने नियमितीकरण के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत के अनुसार कर्मचारी की मृत्यु के साथ नियमितीकरण का अधिकार स्वतः समाप्त नहीं हो जाता। यदि कर्मचारी नियमितीकरण के लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करता था, तो उसके आश्रित को नियमानुसार संबंधित लाभ मिल सकता है। इस फैसले को मृतक कर्मचारियों के परिवारों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अदालत ने क्या कहा
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाने से उसके नियमितीकरण से जुड़ा दावा अपने आप समाप्त नहीं माना जा सकता। यदि कर्मचारी सेवा के दौरान नियमितीकरण की पात्रता पूरी करता था, तो उसके मामले पर संबंधित नियमों के तहत विचार किया जाना जरूरी है।
मृतक कर्मचारी के आश्रित को राहत
अदालत की टिप्पणी से उन परिवारों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है, जिनके परिवार के सदस्य नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही दुनिया से चले गए। ऐसे मामलों में कर्मचारी की पात्रता और सेवा से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आश्रित के दावे पर नियमानुसार निर्णय लिया जा सकता है।
नियमितीकरण का अधिकार महत्वपूर्ण
हाई कोर्ट ने माना कि नियमितीकरण से जुड़ा अधिकार केवल कर्मचारी की व्यक्तिगत सेवा तक सीमित नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब कर्मचारी ने अपने कार्यकाल में इसके लिए आवश्यक शर्तें पूरी कर ली हों। इसलिए केवल मृत्यु के आधार पर दावे को खारिज करना उचित नहीं होगा।
परिवार को मिल सकता है लाभ
इस फैसले का असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जहां कर्मचारी की मृत्यु नियमितीकरण का लाभ मिलने से पहले हो गई। हालांकि, आश्रित को लाभ संबंधित सेवा नियमों, कर्मचारी की पात्रता और मामले के तथ्यों के आधार पर ही मिलेगा।
फैसले का महत्व
हाई कोर्ट की यह टिप्पणी सरकारी और अन्य संस्थानों में कार्यरत ऐसे कर्मचारियों के परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनका नियमितीकरण लंबे समय से लंबित रहा है। इससे संबंधित मामलों में विभागों को कर्मचारी की मृत्यु के बावजूद उसके नियमितीकरण के दावे पर नियमों के अनुसार विचार करना होगा।



