Taste of Uttar Pradesh: लखनऊ में 75 जिलों के जायके का संगम, पहले दिन उमड़ी भीड़

लखनऊ में 4 नवंबर को ‘Taste of Uttar Pradesh’ प्रदर्शनी की शुरुआत हुई। दैनिक जागरण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग के संयुक्त आयोजन में प्रदेश के सभी 75 जिलों के खान-पान की खासियतें पेश की जा रही हैं। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सजी दुकानों पर लोगों ने अलग-अलग जिलों के पारंपरिक पकवानों और मिठाइयों के बारे में जानकारी ली और उनका स्वाद चखा।
ब्रज से अवध तक, हर क्षेत्र का अलग जायका
प्रदर्शनी को प्रदेश के अलग-अलग सांस्कृतिक और भौगोलिक क्षेत्रों की पहचान के आधार पर सजाया गया है। इसमें ब्रज की मिठास, अवध का जायका, रुहेलखंड की रसधार, बुंदेली बहार, पश्चिमी परिमल और पुरबिया स्वाद जैसे खंड शामिल हैं। इन माध्यमों से उत्तर प्रदेश की विविध खान-पान परंपराओं को एक ही जगह अनुभव करने का अवसर मिल रहा है।
मक्खन मलाई से हब्शी हलवे तक खास आकर्षण
प्रदर्शनी में लखनऊ की मक्खन मलाई, आलू टिकिया, मटर चाट और रेवड़ी के साथ बाराबंकी की चंद्रकला, गोंडा का दही बड़ा और रामपुर का प्रसिद्ध हब्शी हलवा लोगों के लिए खास आकर्षण हैं। इसके अलावा कानपुर का समोसा, औरैया की बालूशाही, कन्नौज की गट्टा मिठाई, सीतापुर का पेड़ा, उन्नाव का काला जामुन और बागपत का घेवर भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
बुंदेलखंड और पूर्वांचल के पारंपरिक व्यंजनों की झलक
बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजनों में हमीरपुर का सन्नाटा, दाल मारे और महुआ बर्फी जैसे पकवान शामिल हैं। वहीं पूर्वांचल के जिलों से लिट्टी-चोखा, बाटी-चोखा, काले चावल की खीर और अन्य स्थानीय खाद्य उत्पादों को प्रदर्शित किया जा रहा है। इन व्यंजनों के जरिए लोगों को क्षेत्रीय खान-पान की विशिष्टता जानने का मौका मिल रहा है।
स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को मिल रहा मंच
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य सिर्फ प्रदेश के व्यंजनों को लोकप्रिय बनाना नहीं है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, पाक विशेषज्ञों और छोटे उद्यमियों को भी पहचान दिलाना है। यहां व्यंजनों के साथ विभिन्न जिलों के प्रमुख स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इससे कारोबारियों को अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने और नए बाजार तलाशने का अवसर मिल रहा है।
स्वाद के साथ संस्कृति और शिल्प का अनुभव
‘Taste of Uttar Pradesh’ में खान-पान के अलावा लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक शिल्प को भी जगह दी गई है। आगंतुकों को पीतल, वस्त्र और मिट्टी के बर्तनों जैसे पारंपरिक शिल्प को करीब से देखने और कारीगरों से बातचीत करने का अवसर मिल रहा है। इस तरह यह आयोजन प्रदेश की खाद्य विरासत के साथ उसकी कला और संस्कृति को भी सामने ला रहा है।
5 नवंबर तक चलेगी प्रदर्शनी, प्रवेश के लिए QR पास
यह आयोजन 4 और 5 नवंबर 2026 को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, विभूति खंड, गोमती नगर में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के आधिकारिक पंजीकरण पेज के अनुसार, प्रवेश निःशुल्क है, लेकिन इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण और QR एंट्री पास जरूरी है। आगंतुकों को प्रवेश के समय पास के साथ वैध फोटो पहचान पत्र भी दिखाना होगा।
आयोजन की प्रमुख जानकारी:
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तारीख: 4 और 5 नवंबर 2026
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स्थान: इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर, लखनऊ
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समय: सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक
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विशेष आकर्षण: 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजन, स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
- प्रवेश: निःशुल्क पंजीकरण और QR पास के माध्यम से



