UP में मिलावटी दूध-डेयरी प्रोडक्ट पर सख्ती, लाइसेंस होगा निरस्त; ब्रांड पर भी लगेगा बैन

उत्तर प्रदेश में दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट करने वालों के खिलाफ योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावटी और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक डेयरी उत्पादों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। खास तौर पर ऐसे उत्पादों पर नजर है, जिनमें दूध की जगह या उसके साथ हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है।
खतरनाक केमिकल मिला तो लाइसेंस पर कार्रवाई
रिपोर्ट के मुताबिक डेयरी उत्पादों में डिटर्जेंट और टाइटेनियम डाईऑक्साइड जैसे रसायनों के इस्तेमाल को गंभीरता से लिया जा रहा है। जांच में इस तरह की मिलावट सामने आने पर संबंधित इकाई का खाद्य लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है।
सरकार का मकसद मिलावटखोरी पर केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं रहना, बल्कि ऐसे कारोबारियों पर ऐसी कार्रवाई करना है जिससे वे दोबारा उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ न कर सकें।
एनालॉग पनीर, घी और खोया पर भी सख्ती
उत्तर प्रदेश में एनालॉग डेयरी उत्पादों, खासकर पनीर, घी और खोया के खिलाफ भी कार्रवाई तेज की गई है। रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने ऐसे उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध का रुख अपनाया है, जिनमें दूध के स्थान पर दूसरे पदार्थों का इस्तेमाल करके डेयरी उत्पाद जैसा रूप दिया जाता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में अब तक 25 इकाइयों के खिलाफ कदम उठाए गए और करीब 7,686 किलोग्राम मिलावटी या अवैध डेयरी सामग्री नष्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ब्रांड पर भी लग सकता है बैन
सिर्फ निर्माण इकाई ही नहीं, बल्कि गंभीर और बार-बार सामने आने वाले उल्लंघनों की स्थिति में संबंधित ब्रांड के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। इसका उद्देश्य बाजार में मिलावटी उत्पादों की बिक्री और उनकी दोबारा सप्लाई पर रोक लगाना है।
उपभोक्ताओं को क्या फायदा?
इस अभियान से सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। दूध, पनीर, घी और खोया जैसे रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ने से खाद्य सुरक्षा और मिलावट पर नियंत्रण मजबूत हो सकता है।
हालांकि, किसी खास कंपनी या ब्रांड का लाइसेंस तभी प्रभावित होगा जब संबंधित जांच और खाद्य सुरक्षा प्रक्रिया में उल्लंघन साबित हो। इसलिए केवल संदेह के आधार पर किसी ब्रांड को मिलावटी बताना उचित नहीं होगा।
कुल मिलाकर, यूपी सरकार का संदेश साफ है—दूध और डेयरी उत्पादों में खतरनाक मिलावट पाए जाने पर सिर्फ उत्पाद जब्त करने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लाइसेंस और ब्रांड स्तर तक कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।



