UP के 100 रेलवे स्टेशनों पर खुलेंगे CM महिला उत्पाद विपणन केंद्र, SHG को मिलेगा बड़ा बाजार

उत्तर प्रदेश में महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री महिला उत्पाद विपणन योजना के तहत विशेष केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
योजना के तहत प्रदेश के 100 रेलवे और बस स्टेशनों पर महिला उत्पाद विपणन केंद्र खोले जाने हैं। इसके साथ ही पांच एयरपोर्ट पर भी ऐसे केंद्र स्थापित करने की योजना है। यात्रियों की बड़ी संख्या वाले इन स्थानों को उत्पादों की बिक्री के लिए महत्वपूर्ण बाजार के रूप में विकसित किया जाएगा।
इन केंद्रों के जरिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर तैयार खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प, कपड़े और अन्य ग्रामीण उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
सरकार की योजना केवल रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट तक सीमित नहीं है। प्रदेश के सभी 75 जिलों के 826 विकासखंडों में भी विपणन केंद्र विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य गांवों में तैयार होने वाले उत्पादों को स्थानीय बाजार से आगे राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।
महिला स्वयं सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन समूहों से जुड़ी महिलाओं को उत्पाद बनाने के साथ बाजार उपलब्ध होने पर उनकी आमदनी बढ़ाने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। विपणन केंद्र इस पूरी व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे।
सरकार पहले से ही महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। 2026-27 के बजट में भी महिला स्वयं सहायता समूहों को पूंजी उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों की मार्केटिंग को मजबूत करने के लिए प्रावधान किए गए हैं।
रेलवे स्टेशनों पर ऐसे केंद्र खुलने से यात्रियों को भी स्थानीय और क्षेत्रीय उत्पाद खरीदने का अवसर मिलेगा। यह पहल ‘लोकल’ उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। भारतीय रेलवे की ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ पहल भी स्थानीय कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को स्टेशन परिसर में बाजार उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
महिला उत्पाद विपणन केंद्रों के विस्तार से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए बिक्री और आय के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। यदि उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर भी समान रूप से ध्यान दिया गया, तो यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा सकती है।



