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UP Road Safety: चालान सिर्फ जुर्माना नहीं, योगी सरकार का लक्ष्य जीरो डेथ

उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए योगी सरकार ने सख्त प्रवर्तन के साथ सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है। सरकार के मुताबिक ट्रैफिक चालान को केवल जुर्माना वसूलने की कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका असली उद्देश्य वाहन चालकों को नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना और सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य तक लाना है।

चालान का मकसद सिर्फ जुर्माना नहीं

सरकार का फोकस यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा की संस्कृति विकसित करने पर है। ओवरस्पीडिंग, बिना हेलमेट वाहन चलाना, सीट बेल्ट न लगाना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना और अन्य खतरनाक व्यवहार दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ाते हैं।

इसी वजह से प्रवर्तन अभियानों में नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ चालान और अन्य कार्रवाई की जा रही है। इससे लोगों में नियमों के प्रति अनुशासन बढ़ाने की कोशिश है।

हेलमेट और सीट बेल्ट पर खास जोर

सड़क सुरक्षा अभियान में दो पहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और कार सवारों के लिए सीट बेल्ट को विशेष महत्व दिया जा रहा है। हाल के एक विशेष अभियान में यूपी परिवहन विभाग ने बड़ी संख्या में चालान किए और वाहनों को जब्त भी किया था। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 20 से 26 मई के बीच प्रदेश में 57,186 चालान और 2,669 वाहन जब्त किए गए थे।

इनमें हेलमेट नहीं पहनने पर 23,758 चालान किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे स्पष्ट है कि सरकार सड़क हादसों में गंभीर चोट और मृत्यु के जोखिम को कम करने के लिए बुनियादी सुरक्षा नियमों के पालन पर जोर दे रही है।

जीरो डेथ के लिए बहुआयामी रणनीति

सड़क हादसों को केवल ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई से रोकना संभव नहीं है। सड़क की डिजाइन, वाहन की स्थिति, मौसम, ड्राइविंग व्यवहार और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा जैसे कई कारक दुर्घटनाओं के परिणाम को प्रभावित करते हैं। केंद्र सरकार की सड़क सुरक्षा रणनीति में भी Education, Engineering, Enforcement और Emergency Care को प्रमुख आधार माना गया है।

यूपी में भी इसी तरह नियमों के प्रवर्तन के साथ जागरूकता, सुरक्षित सड़क ढांचे और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।

तकनीक से बढ़ेगी निगरानी

सड़क सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस और संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने तथा WhatsApp आधारित सूचना प्रणाली जैसे उपायों पर काम किया है। इससे वाहन चालकों तक ट्रैफिक नियमों और उल्लंघन से संबंधित सूचनाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

आम लोगों की भूमिका सबसे अहम

सरकार की सख्ती के बावजूद सड़क सुरक्षा का लक्ष्य तभी हासिल हो सकता है जब वाहन चालक खुद नियमों का पालन करें। हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल, निर्धारित गति से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग से बचना और मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करना दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

कुल मिलाकर, योगी सरकार का संदेश है कि चालान कार्रवाई का अंतिम लक्ष्य जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि ऐसा सड़क व्यवहार विकसित करना है जिससे हादसे और उनमें होने वाली मौतें लगातार घटें और अंततः ‘जीरो डेथ’ का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

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