UP में एंटीबायोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक, जल्द आएगी नई गाइडलाइन

उत्तर प्रदेश में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध और अनियंत्रित इस्तेमाल पर रोक लगाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी एएमआर की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए प्रदेश स्तर पर नई गाइडलाइन तैयार कर रही है। इसका उद्देश्य मरीजों को जरूरत के मुताबिक सही एंटीबायोटिक उपलब्ध कराना और बैक्टीरिया में दवाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध को नियंत्रित करना है।
केजीएमयू में वर्ल्ड सेप्सिस डे के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं चिकित्सा स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने प्रस्तावित व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एंटीबायोटिक के बढ़ते और गलत इस्तेमाल से दवा प्रतिरोध एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। नई गाइडलाइन तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत डॉक्टरों को एंटीबायोटिक के सही चयन और उसके उचित इस्तेमाल के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। कोशिश होगी कि सामान्य संक्रमणों में बिना जरूरत एंटीबायोटिक न दी जाए, जबकि गंभीर संक्रमण में मरीज की बीमारी और संक्रमण की प्रकृति के अनुसार उपयुक्त दवा का चयन किया जाए।
एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल की कई वजहें सामने आती हैं। वायरल संक्रमण में भी कई बार लोग एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं, जबकि एंटीबायोटिक वायरस पर असर नहीं करती। इसके अलावा बिना डॉक्टर की सलाह दवा लेना, निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले दवा बंद कर देना और जरूरत से ज्यादा शक्तिशाली एंटीबायोटिक का इस्तेमाल भी दवा प्रतिरोध बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में बैक्टीरिया दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। ऐसे में जो दवाएं पहले संक्रमण पर प्रभावी रहती थीं, वे धीरे-धीरे कम असरदार हो सकती हैं। इसके कारण इलाज अधिक जटिल हो सकता है और मरीज को दूसरी या अधिक प्रभावी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है।
प्रस्तावित गाइडलाइन में संक्रमण की गंभीरता का आकलन, जरूरत पड़ने पर जांच और कल्चर रिपोर्ट के आधार पर दवा के चयन जैसी प्रक्रियाओं पर जोर दिए जाने की बात सामने आई है। इससे डॉक्टरों को अलग-अलग तरह के संक्रमणों में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल को लेकर एक वैज्ञानिक और स्पष्ट रोडमैप मिल सकेगा।
अपर मुख्य सचिव के अनुसार, शासनादेश इस महीने के अंतिम सप्ताह या अक्टूबर के पहले सप्ताह तक जारी होने की उम्मीद है। इसके बाद प्रदेश में एंटीबायोटिक के उपयोग को लेकर अधिक व्यवस्थित व्यवस्था लागू की जा सकती है। सरकार का लक्ष्य इलाज की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ भविष्य में एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने के खतरे को कम करना है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस केवल अस्पतालों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर सामान्य संक्रमणों के इलाज पर भी पड़ सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक शुरू न करना और चिकित्सक द्वारा बताई गई दवा व अवधि का पालन करना महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित यूपी गाइडलाइन से राज्य में एंटीबायोटिक के जिम्मेदार और जरूरत-आधारित इस्तेमाल को बढ़ावा देने की उम्मीद है।



