
उत्तर प्रदेश का पोषण मॉडल अब तकनीक आधारित और अधिक पारदर्शी स्वरूप में विकसित हो रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा आधारित ट्रैकिंग की मदद से सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि पोषण योजनाओं का लाभ सही और पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे।
इस व्यवस्था के तहत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों से संबंधित आंकड़ों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे पोषण सेवाओं की निगरानी आसान हुई है और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ी है।
सरकार का दावा है कि तकनीक के उपयोग से फर्जी लाभार्थियों की पहचान रोकने, वितरण प्रणाली को मजबूत करने और जरूरतमंद परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचाने में मदद मिली है। साथ ही, आंगनबाड़ी सेवाओं और पोषण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता भी बढ़ी है।
कुल मिलाकर, डिजिटल पोषण मॉडल उत्तर प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।



