योगी आदित्यनाथ का कांग्रेस पर हमला: तुष्टीकरण के लिए कराया देश का विभाजन, लखनऊ में प्रदर्शनी का उद्घाटन

लखनऊ में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के चलते देश का विभाजन कराया और इस निर्णय ने सनातन भारत को गहरी पीड़ा दी। योगी ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल राजनीतिक फैसला नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन में स्थायी घाव छोड़ने वाली ऐतिहासिक त्रासदी थी।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि विभाजन के समय लाखों लोग विस्थापित हुए, हजारों परिवार उजड़ गए और लाखों निर्दोषों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय सत्ता की लालसा और तुष्टीकरण की नीति ने देश को दो टुकड़ों में बांट दिया। उनके अनुसार, यदि नेतृत्व दृढ़ होता तो भारत के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक ताने-बाने को टूटने से बचाया जा सकता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सनातन भारत” केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा है, जो हजारों वर्षों से एकता और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है। विभाजन ने इस परंपरा को गहरी चोट पहुंचाई। उन्होंने इसे भारत के इतिहास का सबसे दुखद अध्याय बताया और कहा कि हमें इस पीड़ा को याद रखते हुए भविष्य की पीढ़ियों को इसके कारणों और परिणामों के बारे में सचेत करना चाहिए।
लखनऊ में आयोजित इस प्रदर्शनी में विभाजन से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, तस्वीरें, प्रत्यक्षदर्शियों के अनुभव और ऐतिहासिक रिकॉर्ड प्रदर्शित किए गए हैं। इसका उद्देश्य जनता, विशेषकर युवाओं को यह समझाना है कि विभाजन केवल सीमाओं का खिंचाव नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों की ज़िंदगी और संस्कृति पर गहरी चोट थी।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि यह देश की एकता और अखंडता के संकल्प को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी भारतीय इस पीड़ा से सबक लें और किसी भी स्थिति में तुष्टीकरण की राजनीति को देशहित से ऊपर न आने दें।
उन्होंने प्रदर्शनी में आए लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए एकजुट होकर कार्य करना होगा। अतीत की गलतियों से सीखते हुए हमें ऐसा भविष्य बनाना है, जहां कोई भी शक्ति देश की एकता और अखंडता को चुनौती न दे सके।
इस प्रकार, लखनऊ में आयोजित यह प्रदर्शनी केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक चेतावनी है कि सत्ता की राजनीति और तुष्टीकरण के लिए देश की अखंडता से समझौता नहीं होना चाहिए।



