महेंद्र भट्ट का कांग्रेस पर निशाना, गैरसैंण सत्र में सकारात्मक विपक्ष की अपील

उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र से पहले सियासत गरमा गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने पिछले पांच वर्षों में सदन के भीतर जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय घेराव और हंगामे को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि अब सरकार के कार्यकाल के अंतिम सत्र में विपक्ष को सकारात्मक रवैया अपनाना चाहिए।
भट्ट के मुताबिक, विधानसभा जनता की समस्याओं को उठाने और सरकार से जवाब मांगने का महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में विपक्ष को विरोध-प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय रोजगार, विकास, पलायन और अन्य जनहित से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। यह भाजपा की ओर से विपक्ष की भूमिका को लेकर दिया गया राजनीतिक बयान है।
27 अक्टूबर से शुरू होगा गैरसैंण विधानसभा सत्र
उत्तराखंड विधानसभा का तीसरा सत्र 27 अक्टूबर 2026 से गैरसैंण में आयोजित होना निर्धारित है। जारी कार्यक्रम के अनुसार, सत्र 27 और 28 अक्टूबर को चलेगा। चुनावी वर्ष में होने के कारण इस सत्र को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सत्र के दौरान सरकार अनुपूरक बजट और अन्य विधायी कार्यों से जुड़े विषय सदन में रख सकती है। वहीं, विपक्ष प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। सत्र की अवधि कम होने को लेकर भी विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
कांग्रेस भी विधानसभा घेराव की तैयारी में
कांग्रेस ने 27 अक्टूबर को गैरसैंण में विधानसभा घेराव करने की घोषणा की है। पार्टी अंकिता भंडारी प्रकरण के साथ भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, पलायन और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी कर रही है। इससे विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ने की संभावना है।
एक ओर भाजपा विपक्ष से सदन में सकारात्मक चर्चा की अपेक्षा कर रही है, वहीं कांग्रेस सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रही है। ऐसे में गैरसैंण का आगामी सत्र राज्य की राजनीति के लिहाज से अहम रहने की उम्मीद है।
अंतिम सत्र पर रहेंगी राजनीतिक दलों की निगाहें
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए यह सत्र महत्वपूर्ण है। सरकार के सामने अपने कामकाज और योजनाओं को प्रस्तुत करने की चुनौती होगी, जबकि विपक्ष जनहित के मुद्दों के जरिए सरकार को जवाबदेह बनाने की कोशिश करेगा।
अब देखना होगा कि 27 और 28 अक्टूबर को होने वाले सत्र में सदन की कार्यवाही कितनी सुचारु रहती है और जनता से जुड़े मुद्दों पर कितनी सार्थक चर्चा हो पाती है।



