J-36 की उड़ान से बढ़ी चर्चा

चीन के कथित 6th जनरेशन लड़ाकू विमान J-36 की एक और टेस्ट फ्लाइट की रिपोर्ट्स सामने आने के बाद वैश्विक रक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों और वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि इस एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर का फिर से परीक्षण किया गया है। हालांकि, चीन ने अभी तक इस विमान की आधिकारिक तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि J-36 वास्तव में छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है, तो इसमें लो ऑब्जर्वेबिलिटी (स्टील्थ), लंबी दूरी की मारक क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और मानव रहित प्लेटफॉर्म्स के साथ समन्वय जैसी आधुनिक क्षमताएं हो सकती हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भारत के संदर्भ में J-36 की चर्चा के बीच राफेल और स्वदेशी तेजस का भी उल्लेख किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों विमान अलग-अलग पीढ़ी और अलग परिचालन भूमिकाओं के लिए विकसित किए गए हैं। ऐसे में J-36 की संभावित क्षमताओं की तुलना सीधे राफेल या तेजस से करना फिलहाल जल्दबाजी होगी। भविष्य में किसी भी वास्तविक प्रभाव का आकलन तभी संभव होगा जब J-36 की आधिकारिक विशेषताएं और परिचालन स्थिति स्पष्ट हों।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां अब छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की दौड़ में तेजी से निवेश कर रही हैं। ऐसे में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य तकनीक की प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में और तेज हो सकती है।
अस्वीकरण: यह रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रक्षा विश्लेषण, मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल तस्वीरों पर आधारित है। चीन ने J-36 कार्यक्रम और उसकी क्षमताओं की आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत जानकारी अभी जारी नहीं की है।



