
Tarique Rahman की सरकार उस समय आलोचनाओं के घेरे में आ गई जब बांग्लादेश के गृह मंत्री ने भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को भारत का “आंतरिक मामला” बताया। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर टिप्पणी करने की बांग्लादेश के पास कोई गुंजाइश नहीं है।
इसी बयान के बाद बांग्लादेश के कुछ राजनीतिक विश्लेषकों, बुद्धिजीवियों और विपक्षी समूहों ने सरकार पर निशाना साधा। आलोचकों का तर्क है कि सीमा, प्रवासन और नागरिकता से जुड़े मुद्दों का प्रभाव बांग्लादेश पर भी पड़ सकता है, इसलिए सरकार को अधिक सक्रिय और स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उनके अनुसार, गृह मंत्री की टिप्पणी भारत के दृष्टिकोण के अधिक निकट दिखाई देती है, इसी वजह से यह आरोप लगाया जा रहा है कि वह “भारत की भाषा” बोल रहे हैं।
दूसरी ओर, सरकार समर्थक विश्लेषकों का कहना है कि ढाका और नई दिल्ली के बीच संबंध सुधारना तारिक रहमान सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़े हैं और भारत ने नई सरकार के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा भी जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विवाद का मूल कारण केवल एक बयान नहीं, बल्कि यह व्यापक बहस है कि बांग्लादेश को भारत के साथ अपने संबंधों में कितना संतुलन रखना चाहिए। एक पक्ष बेहतर द्विपक्षीय संबंधों को प्राथमिकता देता है, जबकि दूसरा पक्ष चाहता है कि सरकार राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर अधिक मुखर रहे।
कुल मिलाकर, गृह मंत्री के बयान ने बांग्लादेश में भारत नीति को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर से हवा दे दी है। यही वजह है कि कुछ विशेषज्ञ और राजनीतिक टिप्पणीकार तारिक रहमान सरकार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे व्यावहारिक कूटनीति और पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंधों की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।



