बसपा सुप्रीमो मायावती के एलान से बढ़ी बेचैनी, सियासी गलियारों में चर्चा तेज

विपक्षी दलों ने भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए जिस मंशा से गठबंधन कर एकजुटता का आह्वान किया था वह बसपा सुप्रीमो के बयान के बाद बिखरता दिखाई दे रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि बिना गठबंधन के अपने दम पर चुनाव लड़ेंगी। इस बयान के बाद जहां गठबंधन में बेचैनी बढ़ी है तो वहीं भाजपा पदाधिकारी इससे खुश नजर आए। जिन्होंने अपने राजनीतिक समीकरण बैठाने शुरू कर दिए हैं। इसी मुद्दे को लेकर सभी प्रमुख राजनीति दलों के पदाधिकारियों ने अपनी-अपनी राय दी।

– बसपा सांसद हाजी फजर्लुरहमान का कहना है कि इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकता, लेकिन पार्टी को गठबंधन के साथ आना चाहिए।

– भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह सैनी का कहना है कि अनुसूचित वर्ग का पढ़ा-लिखा तबका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद करता है। बसपा प्रत्याशी अलग आने भाजपा को इसका फायदा होगा। हाल ही में हमने अनुसूचित बस्ती संपर्क अभियान चलाया। यह सब उसी का परिणाम है। इसके माध्यम से भाजपा की नीतियां हर वर्ग तक पहुंचाने का काम किया गया।

– कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुजफ्फर अली का कहना है कि बसपा का चाहे जो फैसला हो, कांग्रेस हर बूथ स्तर तक मजबूती के साथ खड़ी है। अगर गठबंधन भी नहीं हुआ तो भी कांग्रेस प्रत्याशी को जीत मिलेगी। राजनीति में सब संभव है। यदि गठबंधन होता है तो वह भी निभाया जाएगा। अभी चुनाव का समय बाकी है।

– रालोद जिलाध्यक्ष राव कैसर का कहना है कि अगर सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करना है तो सभी दलों को एक साथ आना होगा। इसी उद्देश्य के साथ इंडिया गठबंधन बना है। इस चुनाव से साबित हो जाएगा कि कौन इन ताकतों का मुकाबला करना चाहता है और कौन नहीं।

– आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष विशाल गौतम का कहना है कि अभी चुनाव में काफी समय है। राजनीति ऐसा क्षेत्र में जिसमें सब कुछ संभव है।

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