
भारत के उपराष्ट्रपति पद को देश की राजनीति में एक अहम स्थान प्राप्त है। संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी उपराष्ट्रपति के पास होती है, इसलिए इस पद पर बैठने वाला व्यक्ति सिर्फ औपचारिक चेहरा नहीं, बल्कि संसदीय राजनीति का संचालनकर्ता भी होता है। 2025 में उपराष्ट्रपति पद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और अब यह चर्चा तेज हो गई है कि देश का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। राजनीतिक गलियारों में इस बार बीजेपी के लगभग 8 बड़े नेताओं के नाम रेस में बताए जा रहे हैं, जिनमें से कुछ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से भी जुड़े हुए हैं।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस बार ऐसे चेहरे को उपराष्ट्रपति पद पर बैठाना चाहती है, जो न केवल संगठन के लिए स्वीकार्य हो बल्कि देश की राजनीति में मजबूत संदेश भी दे सके। यही कारण है कि जिन नामों की चर्चा चल रही है, उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, वरिष्ठ सांसद और संघ से जुड़े अनुभवी नेता भी शामिल हैं। इन नामों में से किसी को अंतिम रूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी की संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद दिया जाएगा।
RSS से जुड़े नेता का नाम इस रेस में सबसे अधिक सुर्खियां बटोर रहा है। माना जा रहा है कि अगर बीजेपी इस बार संघ पृष्ठभूमि के नेता को उपराष्ट्रपति बनाती है तो यह आने वाले समय में पार्टी के वैचारिक आधार को और मजबूत करेगा। वहीं, कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए किसी महिला नेता या फिर दलित समुदाय से आने वाले नेता को भी यह जिम्मेदारी सौंप सकती है। इससे न केवल पार्टी का जनाधार बढ़ेगा बल्कि विपक्ष को भी कड़ा राजनीतिक संदेश जाएगा।
उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की रणनीति भी अहम रहने वाली है। हालांकि, वर्तमान स्थिति में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की ताकत संसद में इतनी अधिक है कि विपक्ष के लिए अपने उम्मीदवार को जिताना बेहद कठिन होगा। यही कारण है कि विपक्ष केवल प्रतीकात्मक उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रहा है, जबकि वास्तविक मुकाबला बीजेपी के भीतर चल रही इस रेस में है कि आखिर कौन सा चेहरा चुना जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली जीत के बाद अब 2025 में उपराष्ट्रपति पद को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बना रही है। पार्टी इस पद पर ऐसे नेता को बैठाना चाहती है जो आने वाले वर्षों में न केवल संसद को सुचारू रूप से चला सके बल्कि सरकार की नीतियों को भी सकारात्मक ढंग से प्रस्तुत कर सके।
कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा इसका ऐलान भले ही अभी बाकी हो, लेकिन बीजेपी की ओर से नाम तय होते ही देशभर की राजनीति में हलचल मच जाएगी। इस पद पर कौन सा चेहरा चुना जाता है, यह आने वाले समय में भाजपा की राजनीति और संगठनात्मक रणनीति की दिशा भी तय करेगा।



