Teacher’s Day 2025: विद्या से जीवन, जगत और जगदीश की प्राप्ति होती है

भारत में शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) हर साल 5 सितम्बर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर मनाया जाता है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा के महत्व और गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में विद्या को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, क्योंकि विद्या से ही जीवन का मार्गदर्शन होता है। एक कहावत है – “विद्या से जीवन, जगत और जगदीश की प्राप्ति होती है।” इसका अर्थ है कि शिक्षा केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व निर्माण का आधार है।
शिक्षक ही वह दीपक हैं, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। वह केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि नैतिकता, संस्कार और जीवन मूल्यों को भी स्थापित करते हैं। गुरुओं की शिक्षा से ही विद्यार्थी समाज का आदर्श नागरिक बनता है और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देता है। इसी कारण भारतीय परंपरा में गुरु को भगवान से भी उच्च स्थान दिया गया है – “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वरः।”
2025 का शिक्षक दिवस हमें यह सोचने पर प्रेरित करता है कि बदलते युग में शिक्षा का स्वरूप कितना विविध और व्यापक हो गया है। डिजिटल युग में जहां तकनीक ज्ञान का नया माध्यम बनी है, वहीं शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। ऑनलाइन संसाधनों से ज्ञान तो मिल सकता है, लेकिन सही दिशा और मूल्यों की शिक्षा केवल गुरु ही दे सकते हैं।
इस दिन विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने शिक्षकों का सम्मान करें और उनके बताए मार्ग पर चलकर जीवन को सार्थक बनाएं। वहीं शिक्षकों को भी यह संकल्प लेना चाहिए कि वे प्रत्येक विद्यार्थी की प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ाने का अवसर दें।
अतः शिक्षक दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य संबंध की अनमोल परंपरा को जीवित रखने का संकल्प है। विद्या से ही जीवन का उत्थान संभव है, समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है और अंततः ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।



