
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के हालिया सम्मेलन में भारत ने बड़ी कूटनीतिक जीत दर्ज की है। इस बैठक में भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरा, बल्कि वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) में सुधार की भी जोरदार मांग रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री की सक्रिय रणनीति ने स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज और मजबूत करेगा। भारत ने कहा कि आतंकवाद सिर्फ किसी देश की समस्या नहीं है बल्कि यह पूरे क्षेत्र और विश्व के लिए खतरा है। पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को संरक्षण देने और सीमा पार आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर गंभीर चिंता जताई।
भारत ने SCO के सदस्य देशों को यह संदेश दिया कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता और जो देश आतंकवाद को पनाह देते हैं, उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। इस बयान ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दीं क्योंकि वैश्विक समुदाय पहले से ही पाकिस्तान की नीतियों को संदेह की नजर से देख रहा है।
इसके साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की आवश्यकता को भी मजबूती से उठाया। भारत का मानना है कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था पुरानी हो चुकी है और इसमें बदलाव जरूरी है, ताकि उभरते देशों को भी निर्णय प्रक्रिया में बराबरी का हिस्सा मिले। भारत ने स्पष्ट किया कि UN जैसे वैश्विक संगठन तभी प्रभावी साबित होंगे जब उनमें निष्पक्षता और सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
भारत की यह कूटनीतिक चाल इस बात का सबूत है कि वह अब सिर्फ क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक नेतृत्व की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। SCO मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख और UN सुधार की मांग ने भारत की विदेश नीति को और अधिक मजबूत और प्रभावशाली बना दिया है। यह जीत भारत के वैश्विक प्रभाव को नए आयाम देती है।



