
स्वच्छता के क्षेत्र में इंदौर शहर ने जो पहचान बनाई है, वह न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है। लगातार सात बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बनने का खिताब हासिल करने वाले इंदौर ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी है। हाल ही में लैटिन अमेरिकी देशों के प्रतिनिधि इंदौर पहुंचे, जहां उन्हें नगर निगम द्वारा अपनाए गए कचरा प्रबंधन और सफाई व्यवस्था के मॉडल से अवगत कराया गया। यह अवसर केवल अनुभव साझा करने तक सीमित नहीं रहा बल्कि इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि इंदौर का सफाई मॉडल विश्वभर में लागू किए जाने योग्य है।
इंदौर नगर निगम ने शुरुआत से ही स्वच्छता को प्राथमिकता दी और इसे केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानते हुए जनभागीदारी से जोड़ दिया। शहर में घर-घर से कचरा संग्रहण, गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण, आधुनिक ट्रेंचिंग ग्राउंड, बायोगैस संयंत्र और रीसाइक्लिंग यूनिट जैसे उपायों ने इसे स्वच्छता की दिशा में अग्रणी बना दिया। इसके अलावा नागरिकों को जागरूक करने के लिए “डस्टबिन फ्री इंदौर” और “जीरो वेस्ट वॉर्ड” जैसी पहलें भी शुरू की गईं, जिनका परिणाम यह हुआ कि लोग खुद कचरा अलग-अलग करके देने लगे और शहर की सड़कों पर गंदगी नहीं दिखती।
लैटिन अमेरिकी देशों से आए प्रतिनिधियों ने जब इंदौर का मॉडल देखा तो उन्होंने इसे अपने-अपने देशों में लागू करने की इच्छा जताई। उनके अनुसार, इंदौर ने जिस तरीके से कचरे को संसाधन में बदला है, वह न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी है। उदाहरण के लिए, इंदौर में प्रतिदिन निकलने वाले गीले कचरे से बायोगैस बनाई जाती है, जिसका उपयोग बसों को चलाने में किया जा रहा है। वहीं प्लास्टिक और अन्य सूखे कचरे को रीसाइक्लिंग के जरिए नए उत्पादों में बदला जा रहा है। इस मॉडल ने कचरे को समस्या के बजाय अवसर में बदलने का नया नजरिया दिया है।
इंदौर की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यहां प्रशासन और जनता दोनों ने मिलकर सफाई को मिशन बनाया। जहां नगर निगम ने तकनीकी और प्रबंधन संबंधी उपाय लागू किए, वहीं नागरिकों ने अनुशासन और सहयोग से इस अभियान को सफल बनाया। यही कारण है कि इंदौर केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक “स्वच्छता रोल मॉडल” बन गया है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर इंदौर की उपलब्धि यह दर्शाती है कि यदि किसी शहर में राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक कुशलता और नागरिक सहभागिता हो, तो किसी भी चुनौती को अवसर में बदला जा सकता है। लैटिन अमेरिकी देशों के प्रतिनिधियों को इंदौर का यह संदेश साफ था कि स्वच्छता सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत विकास और बेहतर जीवनशैली की नींव है।

