गणेश विसर्जन 2025: पूजा में करें इन मंत्रों का जप और आरती, किस्मत चमक उठेगी

गणेश विसर्जन का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का विसर्जन किया जाता है। दस दिनों तक घरों और पंडालों में स्थापित गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद विसर्जन का आयोजन बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ होता है। मान्यता है कि गणपति बप्पा को श्रद्धापूर्वक विदा करने पर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
इस दिन विशेष रूप से गणेश मंत्रों का जप करने का महत्व बताया गया है। “ॐ गं गणपतये नमः”, “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥” जैसे मंत्रों का जप करने से जीवन की हर कठिनाई दूर होती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। विसर्जन से पूर्व गणेश जी की आरती करना और उन्हें मोदक, लड्डू एवं दूर्वा चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्तजन पूरे भक्ति भाव से आरती गाकर बप्पा को विदा करते हैं।
गणेश विसर्जन के अवसर पर शोभायात्राओं का आयोजन भी धूमधाम से किया जाता है। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजों की गूंज के बीच श्रद्धालु “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारे लगाते हुए बप्पा को विदा करते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह लोगों को एकता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है।
शास्त्रों के अनुसार, गणपति विसर्जन के दिन यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास से पूजा, मंत्र-जप और आरती करता है, तो उसकी किस्मत चमक सकती है। जीवन में नए अवसर मिलते हैं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यही कारण है कि गणेश विसर्जन का पर्व केवल विदाई का नहीं बल्कि नए आरंभ और शुभ फल की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है।



