
भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) ने हाल ही में अपने बयान में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य ताकत और रणनीतिक क्षमता का ऐसा उदाहरण है, जिसने पाकिस्तान को पूरी तरह परास्त कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सशस्त्र बलों में भाई-भतीजावाद या पक्षपात के लिए कोई जगह नहीं होती। यहां केवल योग्यता, अनुशासन और देशभक्ति को महत्व दिया जाता है। यही कारण है कि भारतीय सेना न केवल देश की सीमाओं की सुरक्षा करती है, बल्कि युवाओं को दुनिया देखने और राष्ट्र की सेवा करने का अवसर भी प्रदान करती है।
सीडीएस ने यह भी कहा कि भारतीय सेना हमेशा ‘नेशन फर्स्ट’ की नीति पर काम करती है। सैनिकों के लिए वर्दी केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्र रक्षा का संकल्प होती है। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना किसी भी परिस्थिति में दुश्मन को मात देने में सक्षम है। इस अभियान के जरिए पाकिस्तान को न केवल सैन्य मोर्चे पर हार मिली, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उसकी छवि कमजोर हुई।
भारतीय सेना की खासियत यह है कि इसमें हर पृष्ठभूमि, धर्म और भाषा के लोग शामिल होते हैं। यहां एक ही पहचान होती है – ‘भारत मां का सिपाही’। सेना में भर्ती होने वाला हर जवान यह शपथ लेता है कि वह राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखेगा। यही अनुशासन और निष्ठा भारतीय सशस्त्र बलों को दुनिया की सबसे मजबूत सेनाओं में शामिल करता है।
सीडीएस ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सेना केवल एक करियर का विकल्प नहीं, बल्कि देश सेवा का मार्ग है। यहां सैनिकों को न केवल आधुनिक हथियारों और तकनीक का प्रशिक्षण मिलता है, बल्कि उन्हें दुनिया भर में शांति मिशनों और अंतरराष्ट्रीय अभियानों में काम करने का भी मौका मिलता है। इस तरह भारतीय सेना युवाओं को जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व की कला सिखाती है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज जब देश तेजी से प्रगति कर रहा है, तब सेना की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। सीमा पर सुरक्षा देने के साथ-साथ सेना प्राकृतिक आपदाओं, बचाव कार्यों और मानवीय सेवाओं में भी अग्रणी रहती है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से यह संदेश जाता है कि भारत अपनी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार है।
अंत में, सीडीएस ने कहा कि सशस्त्र बलों में भाई-भतीजावाद नहीं, बल्कि मेहनत और योग्यता के आधार पर अवसर मिलते हैं। यही कारण है कि भारतीय सेना आज विश्व में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सेना में शामिल होकर न केवल अपने सपनों को पूरा करें, बल्कि राष्ट्र को भी और मजबूत बनाने में योगदान दें।



