
जैन समुदाय ने एक अनोखी मिसाल पेश करते हुए एक साथ 186 लक्जरी कारें खरीदीं, जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर में हलचल मच गई। यह खरीदारी किसी एक ब्रांड की नहीं, बल्कि मर्सिडीज, बीएमडब्ल्यू, ऑडी और लेक्सस जैसी प्रीमियम कारों की रही। दिलचस्प बात यह है कि सामूहिक खरीदारी की वजह से इन कारों पर कुल 21 करोड़ रुपये तक की भारी छूट मिली। यह डील भारत में अब तक की सबसे बड़ी लक्जरी कार ग्रुप परचेज मानी जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सामूहिक खरीद गुजरात के एक बड़े जैन समुदाय समूह द्वारा की गई, जिन्होंने मिलकर कई डीलरशिप से बातचीत की और बंपर डिस्काउंट हासिल किया। सामूहिक रूप से इतनी बड़ी संख्या में कारें खरीदने के कारण डीलर्स को भी वॉल्यूम सेल का फायदा मिला, और उन्होंने ग्राहकों को एक्सक्लूसिव छूट, फ्री सर्विस पैकेज, इंश्योरेंस बेनिफिट्स और एक्सटेंडेड वारंटी जैसे अतिरिक्त ऑफर्स दिए।
समुदाय के सदस्यों ने बताया कि यह खरीदारी सिर्फ दिखावे के लिए नहीं थी, बल्कि एकता और सामूहिक सौदेबाजी की ताकत का उदाहरण है। इससे न केवल व्यक्तिगत रूप से लाभ मिला, बल्कि पूरे समुदाय को आर्थिक दृष्टि से फायदा हुआ। ग्रुप परचेजिंग की इस रणनीति ने यह भी साबित कर दिया कि संगठित रूप से की गई खरीददारी से बड़ी-बड़ी कंपनियों से भी बेहतर डील प्राप्त की जा सकती है।
इस पूरे आयोजन को बेहद योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया। पहले समुदाय के सदस्यों ने अपनी पसंद की कारें चुनीं, फिर उनके मॉडल और वेरिएंट के आधार पर डीलर्स से अलग-अलग कोटेशन लिए गए। अंततः संयुक्त रूप से सबसे बेहतरीन ऑफर को चुना गया। डिलीवरी के समय सभी कारें एक साथ समुदायिक कार्यक्रम में सौंपी गईं, जो एक भव्य आयोजन में तब्दील हो गया।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भारत में ग्रुप परचेजिंग की संस्कृति को नया आयाम देगा। इससे अन्य समुदाय या संगठन भी सामूहिक रूप से वाहन खरीदने की दिशा में प्रेरित होंगे। जैन समुदाय की इस पहल ने न केवल आर्थिक समझदारी दिखाई है, बल्कि यह भी साबित किया है कि एकता में बड़ी ताकत होती है — चाहे बात समाज की हो या व्यवसाय की।



