
भारत के लोकतंत्र की विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा एक बार फिर बढ़ी है। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के सांसदों ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। जानकारी के अनुसार, दक्षिण अफ्रीकी संसद के प्रतिनिधियों ने भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) से संपर्क कर चुनावी प्रक्रिया को करीब से समझने और उसका अनुभव लेने की इच्छा जताई है। आयोग के अधिकारियों ने भी इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा है कि विदेशी सांसद भारत की पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत चुनाव प्रणाली को जानने के लिए उत्साहित हैं।
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दक्षिण अफ्रीकी सांसदों ने विशेष रूप से ईवीएम (Electronic Voting Machines) और VVPAT प्रणाली में रुचि दिखाई है। वे यह जानना चाहते हैं कि भारत जैसे विशाल और विविध देश में इतनी बड़ी चुनावी प्रक्रिया कैसे सुचारू रूप से संपन्न होती है। आयोग ने उन्हें आमंत्रित करते हुए बताया कि वे जल्द ही भारत का दौरा कर सकते हैं और बिहार चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों और मतगणना प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकेंगे।
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लोकतांत्रिक सहयोग का यह कदम दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय चुनाव प्रणाली में रुचि दिखाई हो। इससे पहले नेपाल, श्रीलंका, भूटान, और इंडोनेशिया जैसे देशों के प्रतिनिधि भी भारतीय चुनाव आयोग से प्रशिक्षण और जानकारी ले चुके हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का चुनाव आयोग विश्व में सबसे भरोसेमंद और अनुभवी संस्थानों में गिना जाता है। करीब 96 करोड़ मतदाताओं वाले देश में हर चरण का चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से कराना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसी वजह से कई देश भारत के चुनावी मॉडल को अपनाने की दिशा में अध्ययन करते हैं।
दक्षिण अफ्रीकी सांसदों का यह रुख यह दर्शाता है कि भारत का लोकतंत्र न केवल देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। चुनाव आयोग का कहना है कि दोनों देशों के बीच इस साझेदारी से वैश्विक लोकतंत्र को नई दिशा मिलेगी और चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को और बल मिलेगा।



