स्नान पर्वों पर VIP प्रोटोकॉल खत्म, माघ मेले की तैयारियों को लेकर CM योगी की सख्त बैठक
माघ मेले की तैयारियों को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक हाई लेवल बैठक की, जिसमें उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्नान पर्वों के दौरान किसी भी तरह का VIP प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि माघ मेला आस्था, समानता और सनातन परंपरा का प्रतीक है, जहां सभी श्रद्धालु एक समान हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या वर्ग के लिए विशेष व्यवस्था नहीं की जाएगी, जिससे आम श्रद्धालुओं को असुविधा हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने माघ मेले की व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालु देश-विदेश से संगम में स्नान के लिए आते हैं, इसलिए यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग, घाटों की सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत किया जाए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से स्नान पर्वों पर अतिरिक्त पुलिस बल, जल पुलिस और आपदा राहत टीमों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही, ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी करने को कहा गया।
सीएम योगी ने स्वच्छता पर भी जोर देते हुए कहा कि माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश की छवि से भी जुड़ा हुआ है। घाटों, सड़कों, शौचालयों और पेयजल की व्यवस्था को समय पर पूरा किया जाए। नगर निकाय, स्वास्थ्य विभाग और जल निगम के बीच बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से कहा कि संतों, अखाड़ों और कल्पवासियों की आवश्यकताओं का सम्मानपूर्वक समाधान किया जाए। उनके लिए बिजली, पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, मेले में आने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि माघ मेला आस्था और अनुशासन का संगम है। सरकार का लक्ष्य है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित, सहज और श्रद्धा के साथ स्नान कर सके। VIP प्रोटोकॉल समाप्त करने का निर्णय इसी भावना को मजबूत करता है, जिससे माघ मेला समानता और सनातन मूल्यों का जीवंत उदाहरण बने।



