
केंद्रीय रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव अमेरिका पहुंच चुके हैं, जहां वे क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पूरी दुनिया सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी स्टोरेज, रक्षा उपकरणों और ग्रीन एनर्जी तकनीकों के लिए जरूरी दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति को लेकर गंभीर रणनीति बना रही है। लिथियम, कोबाल्ट, निकल, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे क्रिटिकल मिनरल्स आज आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। भारत भी तेजी से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सौर ऊर्जा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में इन खनिजों की सुरक्षित और स्थिर आपूर्ति देश की आर्थिक और तकनीकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। अमेरिका में होने वाली यह बैठक विभिन्न देशों, उद्योग जगत और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाकर सप्लाई चेन को मजबूत करने, नए निवेश को बढ़ावा देने और पारदर्शी खनन तथा प्रोसेसिंग पर सहयोग की दिशा तय करेगी। अश्विनी वैष्णव इस दौरान अमेरिकी अधिकारियों, वैश्विक कंपनियों और निवेशकों के साथ बातचीत कर भारत के लिए दीर्घकालिक साझेदारी के रास्ते खोलने की कोशिश करेंगे। भारत सरकार पहले ही घरेलू स्तर पर क्रिटिकल मिनरल्स के सर्वे, खनन और रिफाइनिंग को गति देने के लिए कई नीतिगत कदम उठा चुकी है, लेकिन वैश्विक सहयोग के बिना इनकी आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकती। यही कारण है कि अमेरिका जैसे रणनीतिक साझेदार के साथ मिलकर नई सप्लाई चेन तैयार करना भारत की प्राथमिकता है। इस बैठक में तकनीक ट्रांसफर, संयुक्त उद्यम, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है, जिससे भारत को केवल कच्चा माल ही नहीं बल्कि वैल्यू एडिशन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में भी बढ़त मिल सके। अश्विनी वैष्णव की यह यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है, क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा, हरित विकास और डिजिटल भविष्य से जुड़ी रणनीतियों को नई दिशा मिलेगी। कुल मिलाकर, यह दौरा भारत के आत्मनिर्भर और टिकाऊ औद्योगिक भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।



