
भारतीय सेना में महिलाओं की भर्ती को लेकर हाल ही में आर्मी चीफ ने महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भविष्य में महिलाओं को इन्फेंट्री फोर्स में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ विशेष शर्तों को पूरा करना होगा। आर्मी चीफ ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की भर्तियों में शारीरिक क्षमता और तकनीकी दक्षता को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महिला सैनिकों को भी उसी तरह की कठोर प्रशिक्षण प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, जैसे पुरुष जवान करते हैं।
इसके अलावा आर्मी चीफ ने यह भी बताया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान बनाए रखना भारतीय सेना की प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को लड़ाकू यूनिट्स में शामिल करने से पहले उनके लिए विशेष सुरक्षा मानक, प्रशिक्षण सुविधाएँ और मानसिक स्वास्थ्य सहायता सुनिश्चित की जाएगी। आर्मी चीफ के अनुसार, महिलाओं की भर्ती से सेना की कार्यकुशलता और बहुमुखी क्षमता बढ़ेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला सैनिकों को केवल सपोर्टिंग या बैक-ऑफिस रोल में नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ऑपरेशन के मोर्चों पर सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। इसके लिए नई नीतियों और प्रशिक्षण मॉड्यूल पर काम किया जा रहा है। सेना प्रमुख ने यह भी जोर दिया कि यह कदम महिला सशक्तिकरण और समानता के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
आर्मी चीफ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महिलाओं के शामिल होने से सेना की मानसिकता और टीम वर्क की क्षमता में सुधार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए शारीरिक टेस्ट को उनके आकार और क्षमता के अनुसार उपयुक्त रूप से तैयार किया जाएगा, ताकि उन्हें भी पुरुष सैनिकों की तरह चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण का अनुभव मिल सके।
इस निर्णय से भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव सेना में नई सोच और प्रगतिशील मानसिकता को बढ़ावा देगा। वहीं, महिलाओं के लिए यह अवसर चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ करियर में नई संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा।



