
वैश्विक विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने एक अहम रिपोर्ट में कहा है कि भारत और दक्षिण एशिया की एयरलाइंस को वर्ष 2044 तक लगभग 3300 नए विमानों की आवश्यकता होगी। यह अनुमान क्षेत्र में तेजी से बढ़ती हवाई यात्रा की मांग, बढ़ती मध्यम वर्गीय आबादी, शहरीकरण और मजबूत आर्थिक विकास को देखते हुए लगाया गया है। बोइंग के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नागरिक उड्डयन बाजारों में से एक बन चुका है और आने वाले दो दशकों में यह रुझान और मजबूत होगा। रिपोर्ट में बताया गया है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते एयरलाइंस अपने बेड़े का विस्तार करने और पुराने विमानों को अधिक ईंधन-कुशल नए विमानों से बदलने पर जोर दे रही हैं।
बोइंग का कहना है कि इस मांग का बड़ा हिस्सा सिंगल-आइल (नैरो-बॉडी) विमानों से पूरा होगा, जो छोटी और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं। भारत जैसे देश में, जहां घरेलू हवाई नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और टियर-2 व टियर-3 शहरों को हवाई नक्शे पर जोड़ा जा रहा है, ऐसे विमानों की जरूरत और भी बढ़ जाती है। इसके साथ ही वाइड-बॉडी विमानों की मांग भी बढ़ने की संभावना है, खासकर लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और कार्गो सेवाओं के लिए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना (उड़ान), हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे में निवेश और निजी एयरलाइंस की आक्रामक विस्तार रणनीतियां इस विकास को गति दे रही हैं। कम लागत वाली एयरलाइंस (लो-कॉस्ट कैरियर्स) की बढ़ती हिस्सेदारी ने हवाई यात्रा को आम लोगों के लिए सुलभ बनाया है, जिससे पहली बार उड़ान भरने वाले यात्रियों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है।
बोइंग के अनुमान के अनुसार, नए विमानों की यह मांग न केवल विमान निर्माण उद्योग के लिए अवसर पैदा करेगी, बल्कि पायलट, केबिन क्रू, मेंटेनेंस इंजीनियर और ग्राउंड स्टाफ जैसी नौकरियों में भी लाखों नए रोजगार सृजित करेगी। कुल मिलाकर, भारत और दक्षिण एशिया का विमानन क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक एविएशन ग्रोथ का प्रमुख इंजन बनने की ओर बढ़ रहा है।



