
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। विधायक मैथिली ठाकुर ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर सीधा हमला बोलते हुए पूछा कि आखिर सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी तादाद में खाली पद, दवाइयों की अनुपलब्धता और उपकरणों की खराब स्थिति जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। विधायक का कहना है कि कई बार इन मुद्दों को सदन से लेकर विभागीय बैठकों तक उठाया गया, मगर हालात जस के तस बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आम जनता को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। मैथिली ठाकुर ने मंत्री से जवाब मांगते हुए पूछा कि आखिर कब तक मरीज बदहाल व्यवस्था का शिकार होते रहेंगे और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि खाली पदों पर जल्द बहाली हो, अस्पतालों में दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। विधायक के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी करार दे रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम हो रहा है और कई नई योजनाएं जमीन पर उतारी गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मंत्री मंगल पांडेय इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और विभाग की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल इस बयान ने स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति और सरकार की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जिसमें जनता भी जवाब चाहती है कि व्यवस्था में सुधार कब दिखाई देगा।
