
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। हालिया घटनाक्रमों के बाद भारत समेत कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच यह नया तनाव वैश्विक स्तर पर भी असर डाल सकता है। भारत सरकार ने विशेष रूप से उन नागरिकों को सावधानी बरतने को कहा है जो व्यापार, नौकरी या अन्य कारणों से मिडिल ईस्ट के देशों में रह रहे हैं। दूतावासों को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट से होकर गुजरने वाले प्रमुख शिपिंग रूट्स पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद समय-समय पर उभरता रहा है, लेकिन इस बार हालात ज्यादा संवेदनशील बताए जा रहे हैं। कई पश्चिमी देशों ने भी अपने नागरिकों को उच्च सतर्कता बरतने की सलाह दी है। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी खाड़ी देशों में कार्यरत हैं और देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा होता है। ऐसे में सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ा दी गई है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा या क्षेत्र किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।



