धर्म-आस्था

रवि प्रदोष व्रत 2026: पूजा के साथ कथा पाठ क्यों है जरूरी? जानें विधि और महत्व

रवि प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। जब प्रदोष तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे रवि प्रदोष कहा जाता है। इस दिन सच्चे मन से व्रत, पूजा और कथा पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। विशेष रूप से संतान सुख, स्वास्थ्य और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए यह व्रत फलदायी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है। भक्त प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और शाम के समय प्रदोष काल में विधि-विधान से पूजा करते हैं। पूजा में बेलपत्र, धतूरा, गंगाजल, अक्षत और फल अर्पित किए जाते हैं। साथ ही “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से मन की शुद्धि होती है। लेकिन केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करना भी अनिवार्य बताया गया है।

प्रदोष व्रत कथा के अनुसार एक निर्धन ब्राह्मण परिवार ने श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत किया। उनकी कठिन परिस्थितियां धीरे-धीरे समाप्त हो गईं और उन्हें समृद्धि का आशीर्वाद मिला। कथा यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति और नियमपूर्वक किया गया व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करता है। इसलिए रवि प्रदोष के दिन कथा पाठ करना व्रत को पूर्णता प्रदान करता है।

इस पावन अवसर पर शिव मंदिर में दीप प्रज्वलित करना, रुद्राभिषेक कराना और जरूरतमंदों को दान देना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा से यह व्रत करते हैं, उन पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। रवि प्रदोष 2026 के दिन यदि विधिपूर्वक पूजा और कथा का पाठ किया जाए, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

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