धर्म-आस्था

Bhalchandra Chaturthi 2026 का शुभ संयोग: इन योगों में करें पूजा, बरसेगी श्रीगणेश की कृपा

हिंदू पंचांग के अनुसार Bhalchandra Chaturthi का पर्व भगवान श्रीगणेश को समर्पित है। साल 2026 में यह तिथि विशेष महत्व लेकर आ रही है, क्योंकि इस दिन तीन दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि जब चतुर्थी तिथि विशेष नक्षत्र और शुभ योग के साथ मिलती है, तो पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस बार भालचंद्र चतुर्थी पर ऐसा ही शुभ अवसर बन रहा है, जिसे साधकों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जा रहा है।

पहला दुर्लभ संयोग चतुर्थी तिथि का शुभ वार के साथ पड़ना है, जिसे गणेश उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। दूसरा महत्वपूर्ण योग विशेष नक्षत्र का है, जो मानसिक शांति और कार्य सिद्धि का कारक माना जाता है। तीसरा संयोग शुभ योग का है, जिसमें व्रत, दान और मंत्र जाप करने से विघ्नों का नाश होता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन तीनों संयोगों का एक साथ बनना अत्यंत दुर्लभ होता है और यह भक्तों के लिए सफलता, समृद्धि और सुख का संकेत देता है।

भालचंद्र चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने, दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करने का विशेष महत्व है। सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें और गणपति अथर्वशीर्ष या गणेश मंत्रों का जाप करें। शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करना शुभ माना जाता है। इस दिन सच्चे मन से की गई प्रार्थना जीवन के संकटों को दूर करने में सहायक मानी जाती है।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान गणेश ‘विघ्नहर्ता’ हैं और हर शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा का विधान है। 2026 की भालचंद्र चतुर्थी पर बन रहे ये तीन दुर्लभ संयोग भक्तों के लिए एक स्वर्णिम अवसर की तरह हैं। यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा की जाए, तो गणपति बप्पा की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

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