
तमिलनाडु के प्रसिद्ध तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर में दीपम आयोजन को लेकर उठा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उसके पूर्व आदेशों का पालन करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जानकारी के अनुसार, मंदिर परिसर में दीपम जलाने की परंपरा को लेकर कुछ पक्षों के बीच मतभेद उत्पन्न हुए थे, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। हाई कोर्ट ने पहले ही इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि जिला कलेक्टर ने उन आदेशों का सही तरीके से पालन नहीं किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की जाएगी तो यह कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती होगी। कोर्ट ने प्रशासन को चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी धार्मिक आयोजन को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि सभी संबंधित पक्षों से संवाद कर शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए ताकि धार्मिक आस्थाओं को ठेस न पहुंचे और कानून-व्यवस्था भी बनी रहे। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही और धार्मिक परंपराओं के संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन अदालत के निर्देशों का पालन किस तरह सुनिश्चित करता है और मंदिर में दीपम आयोजन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।



