
समुद्र में होने वाले आधुनिक युद्ध में टॉरपीडो सबसे घातक हथियारों में गिने जाते हैं। हाल ही में चर्चा में आया मार्क-48 (Mark-48) टॉरपीडो ऐसा ही एक शक्तिशाली हथियार है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी नौसेना करती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी टॉरपीडो की मदद से अमेरिका ने एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर तबाह कर दिया। पानी के अंदर से हमला करने की इसकी क्षमता और सटीक निशाना इसे दुनिया के सबसे खतरनाक टॉरपीडो में शामिल करती है।
मार्क-48 टॉरपीडो को अमेरिका ने विशेष रूप से पनडुब्बियों के लिए विकसित किया है। यह एक हैवीवेट टॉरपीडो है, जिसे दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे अमेरिकी नौसेना की कई आधुनिक पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है। इस टॉरपीडो की लंबाई करीब 19 फीट होती है और इसका वजन लगभग 1,600 किलोग्राम तक होता है।
इस टॉरपीडो की सबसे बड़ी खासियत इसकी एडवांस गाइडेंस और सोनार सिस्टम है। Mark-48 अपने लक्ष्य को खोजने के लिए सक्रिय और निष्क्रिय सोनार तकनीक का उपयोग करता है। यानी यह पानी के भीतर दुश्मन के जहाज की आवाज और हलचल को पहचानकर उसका पीछा कर सकता है। यदि लक्ष्य अपनी दिशा बदल भी ले, तो यह टॉरपीडो उसे ट्रैक करते हुए हमला कर सकता है।
मार्क-48 की गति भी बेहद तेज होती है। यह पानी के अंदर लगभग 55 नॉट (करीब 100 किमी/घंटा) की रफ्तार से चल सकता है। इसकी मारक क्षमता 38 किलोमीटर तक मानी जाती है। इसमें करीब 295 किलोग्राम का शक्तिशाली विस्फोटक वारहेड लगा होता है, जो किसी बड़े युद्धपोत को भी गंभीर नुकसान पहुंचाने के लिए काफी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक Mark-48 सीधे जहाज से टकराकर ही नहीं बल्कि जहाज के नीचे विस्फोट कर उसे दो हिस्सों में तोड़ने की क्षमता भी रखता है। यही वजह है कि इसे आधुनिक नौसैनिक युद्ध का बेहद घातक हथियार माना जाता है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इस टॉरपीडो का नाम फिर चर्चा में आ गया है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पानी के भीतर से होने वाले ऐसे हमले दुश्मन को अचानक और भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी कारण Mark-48 आज भी अमेरिकी नौसेना के सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली हथियारों में शामिल है।



