
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए, जिससे राजधानी तेहरान सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर भारी तबाही की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में ईरान के 50 से ज्यादा जहाज नष्ट हो गए हैं। यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई बताई जा रही है। हमले के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी और इजरायली सेना ने संयुक्त रूप से ईरान के नौसैनिक ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। इन हमलों में ड्रोन, मिसाइल और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। हमले इतने तेज और सटीक थे कि ईरान को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई जहाज बंदरगाहों पर ही तबाह हो गए, जबकि कुछ समुद्र में ही डूब गए। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई से ईरान की नौसैनिक ताकत को बड़ा झटका लगा है।
तेहरान और आसपास के इलाकों में हमलों के बाद अफरा-तफरी का माहौल है। कई जगहों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं और आसमान में धुएं के गुबार देखे गए। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। वहीं ईरानी सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के सैन्य अधिकारियों का कहना है कि वे अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है तो क्षेत्र में बड़ा सैन्य टकराव देखने को मिल सकता है। दुनिया के कई देशों ने इस बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट के हालात पर टिकी हुई है, क्योंकि इस संघर्ष का असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।


