
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जारी बहस के बीच Om Birla ने सदन की कार्यवाही और संसदीय नियमों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संसद किसी एक व्यक्ति या दल की नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की लोकतांत्रिक संस्था है। इसलिए सदन में बोलने, मुद्दे उठाने और चर्चा करने के लिए सभी को नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।
ओम बिरला ने यह भी कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi भी सदन में बोलने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत नोटिस देते हैं। इससे यह संदेश जाता है कि संसदीय परंपराओं और नियमों का पालन हर सदस्य को करना चाहिए, चाहे वह सरकार का हिस्सा हो या विपक्ष का।
लोकसभा अध्यक्ष का यह बयान उस समय आया जब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों के बीच तीखी बहस और व्यवधान देखने को मिला। बिरला ने सदस्यों से अपील की कि वे अनुशासन बनाए रखें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें। उन्होंने कहा कि संसद में स्वस्थ बहस और संवाद लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है, लेकिन यह सब नियमों के दायरे में रहकर होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है और अपनी बात रख सकता है। लेकिन इस प्रक्रिया को गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ निभाना जरूरी है। यदि सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती है, तो इससे जनता के मुद्दों पर चर्चा प्रभावित होती है।
ओम बिरला ने सभी दलों के सांसदों से आग्रह किया कि वे संसद की परंपराओं का सम्मान करें और सकारात्मक चर्चा के माध्यम से देश के विकास से जुड़े विषयों पर विचार करें। उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है और इसकी गरिमा बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अंत में लोकसभा अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि सभी सांसद नियमों का पालन करते हुए रचनात्मक बहस में भाग लेंगे, ताकि संसद के माध्यम से जनता की अपेक्षाओं और समस्याओं का समाधान बेहतर तरीके से किया जा सके।



