प्रदेश में Ola-Uber टैक्सियों पर सख्ती: अब पंजीकरण और लाइसेंस होगा अनिवार्य

प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर अब सरकार सख्त नजर रखने जा रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब Ola और Uber जैसी कंपनियों से जुड़ी टैक्सियों को संचालन के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण और लाइसेंस लेना होगा। नए नियमों के तहत राज्य में चल रही सभी ऐप आधारित कैब सेवाओं को परिवहन विभाग के साथ रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना, किराया व्यवस्था में पारदर्शिता लाना और टैक्सी संचालन को व्यवस्थित करना है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से ऐप आधारित टैक्सियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन इनके संचालन को लेकर कई शिकायतें भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में बिना वैध दस्तावेजों के गाड़ियां चलने, किराए में मनमानी और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने इस पूरे सेक्टर को एक स्पष्ट कानूनी ढांचे में लाने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत टैक्सी एग्रीगेटर कंपनियों को सरकार से लाइसेंस लेना होगा और उनसे जुड़ी हर गाड़ी का सत्यापन भी कराया जाएगा।
नियमों के अनुसार ड्राइवरों को वैध ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। साथ ही कंपनियों को यात्रियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए एक मजबूत व्यवस्था भी बनानी होगी। परिवहन विभाग समय-समय पर इन सेवाओं की निगरानी करेगा ताकि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
सरकार का मानना है कि इस कदम से टैक्सी सेवाओं में अनुशासन आएगा और यात्रियों को सुरक्षित तथा भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा पारंपरिक टैक्सी और ऑटो चालकों की शिकायतों को भी कुछ हद तक दूर करने में मदद मिलेगी, क्योंकि लंबे समय से वे ऐप आधारित टैक्सियों के अनियमित संचालन को लेकर विरोध जताते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन नियमों को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो इससे पूरे परिवहन तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही यात्रियों को बेहतर सेवा मिलने के साथ-साथ ड्राइवरों के लिए भी स्पष्ट नियम और अधिकार तय हो सकेंगे। आने वाले समय में सरकार इन सेवाओं के लिए किराया निर्धारण, सुरक्षा मानकों और तकनीकी निगरानी जैसे पहलुओं पर भी और सख्त दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।



